मुंबई भाजपा टैक्सी-रिक्शा यूनियन अध्यक्ष के.के. तिवारी ने दिया इस्तीफा, पार्टी नेतृत्व पर लगाए उपेक्षा के आरोप

भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम और महामंत्री पवन त्रिपाठी को भेजा त्यागपत्र

मुंबई। मुंबई भाजपा से जुड़े टैक्सी-रिक्शा संगठन में असंतोष का मामला सामने आया है। मुंबई भाजपा टैक्सी-रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष के.के. तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तिवारी ने अपना त्यागपत्र मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम और मुंबई भाजपा महामंत्री पवन त्रिपाठी को भेजते हुए संगठन की कार्यप्रणाली, कार्यकर्ताओं की कथित उपेक्षा और टैक्सी-ऑटो चालकों से जुड़े मुद्दों को उठाने में आ रही बाधाओं को अपने फैसले की वजह बताया है। तिवारी पिछले कुछ समय से मुंबई के टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। हाल में टैक्सी-रिक्शा पर नए नियमों और मराठी भाषा से जुड़े विवाद के दौरान भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी। तिवारी ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाया है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की समस्याओं को संगठन में अपेक्षित महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका दावा है कि मराठी भाषा, टैक्सी-ऑटो चालकों के अधिकार, रोजगार और उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने पर भी उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
‘चालकों की आवाज नहीं उठा सकता तो पद पर रहने का औचित्य नहीं’
तिवारी के मुताबिक टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालक मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके रोजगार एवं अधिकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना संगठन की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई पदाधिकारी अपने ही कार्यकर्ताओं और चालकों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से नहीं उठा सके, तो उसके पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने इस्तीफे के फैसले को अपने स्वाभिमान और संगठन के अस्तित्व से जोड़ते हुए कहा कि लगातार कथित उपेक्षा और दबाव के बीच उनके लिए पद पर बने रहना संभव नहीं था। मुंबई में टैक्सी-ऑटो चालकों से जुड़े मुद्दे हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चा का विषय रहे हैं। अगस्त में मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर पैदा हुए विवाद के दौरान तिवारी ने कहा था कि किसी मान्यता प्राप्त यूनियन ने आधिकारिक हड़ताल नहीं बुलाई थी। सितंबर में उन्होंने टैक्सी पर लाइट लगाने के प्रस्तावित नियम का भी विरोध किया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *