
मुंबई। खार पुलिस ने साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों की भूमिका का खुलासा किया है। जांच में 22 बैंक खातों का पता चला है, जिनके खिलाफ देशभर में 42 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज मिली हैं। इन मामलों में करीब 7.42 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। खार पुलिस थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 183/2026 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(क) और 66(ड) के तहत जांच शुरू की गई थी। शिकायतकर्ता से टेलीग्राम के जरिए संपर्क कर ऑनलाइन टास्क पूरा करने पर अधिक मुनाफा मिलने का लालच दिया गया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में कुल 4,07,764 रुपये जमा करवाकर शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की गई। जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण और भारत सरकार की साइबर हेल्पलाइन 1930 तथा साइबर समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर अविनाश बाबासाहेब खरात और विकास गजानन भुजबळ की भूमिका सामने आई। अविनाश खरात को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने अपने तथा अन्य लोगों के नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगी करने वालों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया था। जांच में अविनाश खरात के नाम पर 13 और विकास भुजबळ के नाम पर 9, यानी कुल 22 बैंक खातों की जानकारी सामने आई। साइबर समन्वय पोर्टल पर इन 22 खातों की जांच करने पर देशभर से संबंधित 42 शिकायतें मिलीं। इन शिकायतों में दर्ज साइबर ठगी की कुल रकम करीब 7,42,28,409 रुपये बताई गई है। पुलिस जांच में आरोपियों के विभिन्न बैंक खातों में ठगी की रकम के बड़े पैमाने पर लेन-देन होने की बात भी सामने आई है। मामले की आगे की जांच खार पुलिस थाने की ओर से जारी है। पुलिस रैकेट से जुड़े अन्य आरोपियों, लाभार्थियों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है। खार पुलिस थाने की साइबर अपराध जांच टीम: वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संतोष काटे, पुलिस निरीक्षक दिपाली मरळे, पुलिस उपनिरीक्षक विजय सैद, पुलिस उपनिरीक्षक गोविंद बेडके, पुलिस हवलदार नागेश पाटील, पुलिस सिपाही रुपाली मोटे और पुलिस सिपाही गणेश लोटे।

