नारायणगढ़ दशहरा सम्मेलन में मनोज जरांगे ने सरकार के सामने रखीं पांच मांगें

हर घर से ‘मराठा सेवक’ तैयार करने का आह्वान, कुणबी प्रमाणपत्र और समाज की समस्याओं के लिए अलग संपर्क नंबर जारी करने की घोषणा

बीड। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने बीड जिले के नारायणगढ़ में आयोजित दशहरा सम्मेलन में आंदोलन की आगे की दिशा स्पष्ट करते हुए मराठा समाज के लिए तीन अलग-अलग संपर्क नंबर जारी करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जो लोग समाज के लिए ‘मराठा सेवक’ के रूप में काम करना चाहते हैं, लेकिन अभी तक उनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके लिए अलग मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाएगा। जरांगे ने कहा कि जिन लोगों की कुणबी प्रविष्टियां मिल चुकी हैं, लेकिन उन्हें प्रमाणपत्र, वैधता या आरक्षण संबंधी प्रक्रिया में परेशानी आ रही है, उनके लिए अलग नंबर होगा। इसके अलावा आरक्षण से इतर मराठा समाज की अन्य समस्याओं के लिए तीसरा संपर्क नंबर जारी किया जाएगा, जिस पर अपनी समस्या संदेश के माध्यम से दर्ज कराई जा सकेगी। उन्होंने घर-घर से समाजसेवी ‘मराठा सेवक’ तैयार करने का आह्वान किया। नारायणगढ़ के इस दशहरा सम्मेलन में राज्यभर से बड़ी संख्या में मराठा समाज के लोग पहुंचे। जरांगे ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से समाज अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने समाज के लोगों से राजनीतिक नेताओं के पीछे आंख मूंदकर न चलने की अपील करते हुए कहा कि जो नेता समाज के हितों के खिलाफ जाएगा, उसे 2029 के चुनाव में जवाब दिया जाना चाहिए। जरांगे ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये सहायता, संपूर्ण कर्जमाफी, फसल बीमा की पूरी राशि खातों में जमा करने, लंबित कृषि अनुदान जारी करने और गांव-गांव में चारा छावनियां शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मराठा समाज का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है और सूखे जैसी परिस्थितियों में किसानों की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित होती है। इसलिए सरकार को किसानों की सहायता और लंबित भुगतान के मामलों में तत्काल कदम उठाने चाहिए। कुणबी प्रमाणपत्रों का मुद्दा उठाते हुए जरांगे ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर दस्तावेजी प्रविष्टियां मिलने के बावजूद आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे या प्रमाणपत्र जारी करने में अड़चनें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जानकारी सीधे आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि संबंधित अधिकारियों के स्तर पर समस्या उठाई जा सके। जरांगे ने समाज से एकजुट रहने और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संगठित तरीके से काम करने की अपील की। उनका कहना था कि आंदोलन केवल भीड़ जुटाने तक सीमित न रहे, बल्कि गांव और घर स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार किया जाए।

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