
मुंबई। पश्चिम रेलवे के बांद्रा लोकल रेलवे स्टेशन से लगे गरीब नगर इलाके में मंगलवार, 19 मई से अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़े स्तर पर तोड़-फोड़ अभियान शुरू कर दिया गया है। यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा पश्चिम रेलवे को इलाके से अतिक्रमण हटाने की अनुमति दिए जाने के बाद शुरू हुई। यह अभियान 19 मई से 23 मई तक चलाया जाएगा और इसे नागरिक प्रशासन, पुलिस विभाग तथा रेलवे सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से अंजाम दिया जा रहा है, ताकि पूरे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनी रहे। यह कार्रवाई रेलवे की उस जमीन को खाली कराने के लिए की जा रही है, जिस पर लंबे समय से अवैध निर्माण किए गए थे। अभियान के दौरान इलाके में भारी पुलिस बंदोबस्त किया गया है। मुंबई पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और जीआरपी सहित करीब 400 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा अग्निशमन दल, एम्बुलेंस और बैरिकेडिंग की भी व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। यह पूरा मामला 5 मई को आए बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुआ, जिसमें अदालत ने पश्चिम रेलवे को तोड़-फोड़ अभियान जारी रखने की अनुमति दी थी। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि वर्ष 2021 के सर्वे में जिन झुग्गीवासियों को पात्र पाया गया था, उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। इससे पहले ‘गरीब नगर रहिवासी कल्याण संघ सोसाइटी’ ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि 18 मार्च के अंतरिम आदेश के बावजूद पात्र प्रोजेक्ट प्रभावित व्यक्तियों के कई घर तोड़ दिए गए, जिससे परिवारों को भारी मानसिक तनाव, विस्थापन और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। याचिका में यह भी कहा गया कि इस कार्रवाई से संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। वहीं रेलवे की ओर से पेश वकील आयुष केडिया ने अदालत को बताया कि पात्र पीएपी परिवारों का पुनर्वास मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) द्वारा ‘मुंबई वन प्रोजेक्ट’ के तहत किया जाएगा, जिसमें वेस्टर्न रेलवे की लाइन-6 परियोजना का विकास भी शामिल है।




