
मुंबई। राज्य के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए हैं कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और नागरिक केंद्रित बनाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिर, क्रिटिकल केयर ब्लॉक और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं से जुड़े प्रकल्प निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाएं। सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री वॉर रूम की स्थापना की गई है। इसी वॉर रूम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्रा, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के सचिव निपुण विनायक, आयुक्त कादंबरी बलकवडे, वैद्यकीय शिक्षा विभाग के सचिव धीरज कुमार, वैद्यकीय शिक्षा आयुक्त अनिल भंडारी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वैद्यकीय शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ तथा राज्य के सभी विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी, महानगरपालिका आयुक्त और नगरपालिका मुख्याधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। बैठक में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत स्वास्थ्य अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, एचपीवी टीकाकरण अभियान सहित विभिन्न लंबित परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार का विशेष ध्यान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली और आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं विकसित करने पर है। इसके लिए तमिलनाडु समेत विभिन्न राज्यों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का अध्ययन कर महाराष्ट्र के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसका प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त निधि का समय पर उपयोग होना बेहद जरूरी है, इसलिए सभी जिलाधिकारियों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर, क्रिटिकल केयर ब्लॉक और एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के निर्माण कार्यों में तेजी लानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआती दौर में कुछ परियोजनाओं में विलंब हुआ था, लेकिन अब अधिकांश जिलों की प्रगति संतोषजनक है। जिन जिलों में प्रगति अपेक्षाकृत कम है, वहां भी तय समयसीमा में काम पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कोई भी परियोजना लंबित नहीं रहनी चाहिए और सभी विभाग सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करें। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को कम प्राथमिकता वाला क्षेत्र मानने की मानसिकता बदलने की आवश्यकता है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, स्वच्छता और बेहतर ब्रांडिंग होनी चाहिए ताकि लोगों की यह धारणा बदले कि सरकारी अस्पताल अस्वच्छ या निम्नस्तरीय होते हैं। उन्होंने अधिकारियों से मॉड्यूलर तकनीक और आधुनिक पद्धतियों का उपयोग कर समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने पुणे के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किए गए सकारात्मक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मॉडल राज्य के अन्य हिस्सों में भी लागू किए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बैठकों में दिए गए आश्वासनों की समीक्षा आगामी वॉर रूम बैठकों में की जाएगी और सभी अधिकारियों को अपनी समयसीमा का पालन करना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी समस्या लंबित न रखें। यदि किसी स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा हो तो उसे विभाग प्रमुख, सचिव, मुख्य सचिव, मंत्री या मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचाया जाए, लेकिन परियोजना पूर्ण होने तक लगातार प्रयास जारी रहें। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए एचपीवी टीकाकरण अभियान की भी समीक्षा की गई। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए महाराष्ट्र को लगभग 10 लाख बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिलास्तर पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाकर अभिभावकों की सहमति के साथ इस लक्ष्य को समयसीमा में पूरा किया जाए। राज्य में नए 13 मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का कार्य भी प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं में आने वाली सभी अड़चनों को तत्काल दूर कर निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर और मेडिकल कॉलेज परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है और ये सुविधाएं जल्द ही नागरिकों के लिए उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। साथ ही नए मेडिकल कॉलेजों के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन भी बढ़ेगा। वैद्यकीय शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि कुछ स्थानों पर सार्वजनिक निर्माण विभाग के नियमों के कारण अस्पताल निर्माण में बाधाएं आ रही हैं। इन नियमों में आवश्यक बदलाव कर परियोजनाओं को गति दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ परियोजनाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं, लेकिन पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में शुरू नहीं हो पा रही हैं, इसलिए संबंधित जिलाधिकारियों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने जानकारी दी कि राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर उन्नयन कार्य चल रहा है। अब तक 55 पीएसी केंद्रों का उन्नयन किया जा चुका है। इन्हें आधुनिक पायाभूत सुविधाओं, ब्रांडिंग और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए तो नागरिकों को और बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान में महानगरपालिका क्षेत्रों में 1141 तथा नगरपालिका क्षेत्रों में 797 नागरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं। इनके माध्यम से अब तक लाखों बाह्य रोगियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गई हैं। साथ ही प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत राज्य में 36 क्रिटिकल केयर ब्लॉक और 36 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है, जिनमें से कई परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं और बाकी कार्य तेजी से जारी है।




