रामलीला महोत्सव में नारद मोह लीला का सजीव मंचन, भक्ति और हास्य रस में डूबे दर्शक

बांगरमऊ में करीब सवा सौ साल पुरानी परंपरा का निर्वहन, कानपुर के कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोहा

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। नगर के मोहल्ला चौधराना स्थित ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव के अंतर्गत भव्य मंच पर रविवार की रात करीब सवा सौ साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए नारद मोह लीला का सजीव मंचन किया गया। मनमोहक लीला के कलाकारों ने प्रथम दिवस ही दर्शकों को भक्ति, हास्य और शृंगार रस के संगम में डुबो दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम विघ्नहर्ता भगवान गणेश के पूजन एवं आरती के साथ हुआ। इसके बाद पंचेश्वर महादेव मंदिर के सेवादार पं. रविशंकर दीक्षित महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर लीला का शुभारंभ किया। कानपुर से आए कुशल कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से मंच को जीवंत कर दिया।कथानक के अनुसार नारद जी घोर तपस्या में लीन होते हैं, जिससे देवराज इंद्र का सिंहासन डोल उठता है। भयभीत इंद्र उनकी तपस्या भंग करने के लिए अप्सराओं और कामदेव को भेजते हैं, लेकिन नारद की अडिग साधना के सामने सभी परास्त हो जाते हैं। कामदेव स्वयं ‘त्राहिमाम-त्राहिमाम’ पुकारते हुए नारद से क्षमा याचना करते हैं।यहीं से नारद के मन में अहंकार का अंकुर फूट पड़ता है। ‘मैंने कामदेव को जीत लिया’ का दंभ लेकर वे कैलाशपति भगवान शिव के पास पहुंचते हैं। भगवान शिव उन्हें सचेत करते हैं कि यह वृत्तांत भगवान विष्णु को न सुनाएं। ब्रह्मा जी भी यही परामर्श देते हैं, लेकिन अहंकार में डूबे नारद किसी की नहीं सुनते और सीधे क्षीरसागर पहुंचकर भगवान विष्णु को अपनी विजय गाथा सुना देते हैं।लीलाधर भगवान विष्णु मुस्कुराते हैं और नारद के अहंकार को तोड़ने की लीला रचते हैं। मार्ग में एक वैभवशाली नगर में राजकुमारी के स्वयंवर का आयोजन हो रहा होता है। राजकुमारी पर मोहित नारद रूपवान बनने के लिए भगवान विष्णु से उनका ही स्वरूप मांग बैठते हैं, लेकिन प्रभु उन्हें वानर स्वरूप प्रदान कर देते हैं। स्वयंवर सभा में वानर मुख देखकर नारद उपहास के पात्र बन जाते हैं। जब उन्हें वास्तविकता का ज्ञान होता है, तो क्रोध में आकर वे भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं कि जिस प्रकार आपने मुझे सभा में लज्जित किया, उसी प्रकार आप भी एक दिन पत्नी वियोग में तड़पेंगे और यही वानर आपकी सहायता करेंगे। इसी मार्मिक प्रसंग के साथ प्रथम दिवस की लीला का समापन हुआ। कलाकारों के सजीव अभिनय और संवादों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में आयोजन समिति के अध्यक्ष आशीष सिंह ‘गोलू’ ने आरती उतारी और उपस्थित श्रद्धालुओं एवं दर्शकों का आभार व्यक्त किया।

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