गोवंडी में नशीली गोलियों का बड़ा जखीरा बरामद, 9,800 टैबलेट के साथ आरोपी गिरफ्तार

ANC वर्ली यूनिट की कार्रवाई, करीब ₹2.53 करोड़ की Nitrazepam और Alprazolam गोलियां जब्त, सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी

मुंबई। आर्थिक राजधानी की चमक-दमक के पीछे नशे का एक ऐसा अवैध कारोबार भी सक्रिय है, जो युवाओं और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) की वर्ली यूनिट ने गोवंडी के डॉ. जाकिर हुसैन नगर इलाके में कार्रवाई करते हुए 9,800 साइकोट्रोपिक गोलियां जब्त की हैं। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, जब्त गोलियों की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹2.53 करोड़ है। इनमें 4,500 Nitrazepam की NITCOR-10 गोलियां और 5,300 Alprazolam की PROCALM-1 गोलियां शामिल हैं। बताया गया है कि ANC को गोवंडी क्षेत्र में नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तथाकथित ‘बटन’ गोलियों की अवैध बिक्री की सूचना मिली थी। सूचना की पुष्टि के बाद वर्ली यूनिट ने डॉ. जाकिर हुसैन नगर स्थित परिसर पर छापा मारा और बड़ी मात्रा में गोलियां बरामद कीं। इस मामले में देवनार पुलिस स्टेशन में NDPS Act, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में गोलियां आरोपी तक कहां से पहुंचीं, इन्हें किसे सप्लाई किया जाना था और इसके पीछे कोई बड़ा वितरण नेटवर्क सक्रिय है या नहीं।
युवाओं तक पहुंचता नशा बना गंभीर चिंता
यह कार्रवाई केवल जब्ती के आंकड़ों तक सीमित मामला नहीं है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि चिकित्सकीय उपयोग वाली ऐसी दवाएं अवैध तरीके से नशे के लिए युवाओं तक कैसे पहुंच रही हैं। नशे की गिरफ्त में आया कोई किशोर या युवा अकेला प्रभावित नहीं होता, बल्कि उसका पूरा परिवार इसकी कीमत चुकाता है। जिस उम्र में हाथों में किताबें, कलम और भविष्य के सपने होने चाहिए, उसी उम्र में यदि युवा नशे की गिरफ्त में आने लगें तो यह समाज और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है।
नशे की लत आर्थिक और सामाजिक नुकसान के साथ अपराध के जोखिम को भी बढ़ा सकती है। नशे के लिए पैसे जुटाने की मजबूरी कई युवाओं को चोरी और दूसरी गैरकानूनी गतिविधियों की ओर धकेल सकती है। ऐसे में पुलिस कार्रवाई के साथ समय रहते रोकथाम और जागरूकता भी बेहद जरूरी है।
ANC टीम ने कसा शिकंजा
कार्रवाई ANC वर्ली यूनिट के प्रभारी पीआई संतोष सालुंखे, पीआई दिगंबर पाटिल, पीएसआई रोहित साळी और टीम द्वारा की गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस बरामद गोलियों के स्रोत, खरीदारों और संभावित सप्लाई चेन पर है। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन सवाल इससे बड़ा है—क्या केवल पुलिस कार्रवाई से ही इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है?
स्कूल, परिवार और समाज को भी होना होगा सतर्क
नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस थाने और अदालत तक सीमित नहीं रह सकती। परिवारों, स्कूलों, स्थानीय सामाजिक संस्थाओं और मोहल्ला स्तर पर भी जागरूकता जरूरी है। बच्चों और युवाओं के व्यवहार में अचानक बदलाव, संदिग्ध गोलियों का इस्तेमाल या गलत संगत जैसे संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। अब जरूरत इस बात की है कि स्थानीय समुदाय, स्कूल और प्रशासन मिलकर नशे के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं। संदिग्ध अवैध बिक्री की जानकारी समय रहते पुलिस तक पहुंचे और युवाओं को नशे के नुकसान के बारे में लगातार जागरूक किया जाए। सवाल यही है—हर बड़ी जब्ती के बाद कुछ दिनों की चर्चा काफी है, या नशे के इस फैलते जाल के खिलाफ समाज को भी पुलिस के साथ खड़ा होना होगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *