संभावित जलसंकट से निपटने के लिए 25 अक्टूबर तक गांववार कार्ययोजना तैयार करें: मंत्री गुलाबराव पाटील
जल जीवन मिशन की 75 से 99 फीसदी पूरी योजनाओं को प्राथमिकता से चालू करने के निर्देश, टैंकर को बताया अंतिम विकल्प

मुंबई। जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील ने नागपुर, अमरावती और कोकण विभागों में संभावित जलसंकट को देखते हुए सभी चरणों की वस्तुनिष्ठ और गांववार कार्ययोजना 25 अक्टूबर तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत 75 से 99 प्रतिशत तक प्रगति कर चुकी जलापूर्ति योजनाओं को प्राथमिकता से पूरा कर चालू करने को कहा है। बुधवार को सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित समीक्षा बैठक में नागपुर, अमरावती और कोकण विभागों की जलापूर्ति योजनाओं, भूजल स्तर और आने वाले महीनों में संभावित पानी की कमी से निपटने के उपायों की समीक्षा की गई। मंत्री पाटील ने कहा कि फिलहाल इन विभागों में गंभीर जलसंकट नहीं है, लेकिन प्रशासन को संभावित स्थिति को देखते हुए अभी से तैयार रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और ग्राम पंचायतों से चर्चा कर तथा मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति पर आधारित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। जल जीवन मिशन के तहत अंतिम चरण में पहुंच चुकी योजनाओं में पाइपलाइन, पंप, बिजली कनेक्शन और ट्रांसफार्मर जैसे लंबित कार्य तत्काल पूरे करने को कहा गया। मंत्री पाटील ने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक प्रगति वाली योजनाओं की पैकेज संबंधी जानकारी पूरी कर प्रमाणित की जाए, ताकि निधि वितरण में कोई अड़चन न आए। संभावित टैंकर प्रभावित गांवों के लिए जलस्रोत मजबूत करने की अलग कार्ययोजना भी तैयार की जाए। उन्होंने जिला नियोजन समिति के दो प्रतिशत निधि प्रावधान से जलस्रोत सुदृढ़ीकरण के काम प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। इसके तहत कुओं का पुनर्भरण, खेत तालाब, सीमेंट बंधारे, सीमेंट प्लग, लगातार समतल चर और पुराने बंधारों की मरम्मत जैसे काम किए जाएं। जरूरत के अनुसार जिला नियोजन, खनिज निधि और कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व निधि से भी कामों की योजना बनाने को कहा गया। मंत्री पाटील ने स्पष्ट किया कि पानी की कमी दूर करने के लिए टैंकर अंतिम विकल्प होना चाहिए। इससे पहले उपलब्ध कुओं की सफाई और कीटाणुशोधन, स्थानीय जलस्रोतों का पुनर्जीवन, जलापूर्ति का बेहतर नियोजन और पानी के मितव्ययी उपयोग जैसे उपाय प्रभावी रूप से लागू किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी गांव से जलसंकट की शिकायत मिलने या इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने पर संबंधित अधिकारी तत्काल गांव का दौरा कर आवश्यक कार्रवाई करें। बैठक में पूर्ण हो चुकी और सफल परीक्षण से गुजर चुकी जलापूर्ति योजनाओं को जिला परिषद या ग्राम पंचायत के हवाले करने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने पर भी जोर दिया गया। स्थानीय संस्थाओं द्वारा योजना स्वीकार करने में देरी होने पर शासन की नीति के अनुसार आगे की कार्रवाई करने को कहा गया। मंत्री ने कहा कि योजनाओं के संचालन, बिजली बिल और रखरखाव की जिम्मेदारी जिला परिषद और ग्राम पंचायतों को प्रभावी रूप से निभानी होगी। बिजली कनेक्शन या ट्रांसफार्मर से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को जिलाधिकारी और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से समन्वय करने के निर्देश दिए गए। बैठक में नागपुर, अमरावती और कोकण विभागों के जल जीवन प्राधिकरण, विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अभियंता, भूजल सर्वेक्षण एवं विकास यंत्रणा तथा जलापूर्ति विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
