जालना औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान बनाएं उद्योग: मंत्री पंकजा मुंडे
पुरानी प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां बदलने के निर्देश, CSR फंड का उपयोग पर्यावरण सुधार में करने पर जोर

मुंबई। जालना शहर से सटे औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण पर पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने लोहे के उत्पादन और स्क्रैप रीसाइक्लिंग से जुड़े उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्वतंत्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों को महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा सुझाए गए उपायों के लिए अल्प, मध्यम और दीर्घ अवधि की समयसीमा तय करनी होगी। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में मुंडे ने कहा कि पुरानी प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से बदलकर नई तकनीक अपनाई जाए। साथ ही कंपनियां अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का प्राथमिकता से प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण सुधार और स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों में उपयोग करें। बैठक में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव राहुल रेखावार और जालना के स्टील उद्योगों के प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक में बताया गया कि जालना औद्योगिक क्षेत्र में कई उत्पादन इकाइयां पुरानी हैं। लोहे और स्क्रैप प्रोसेसिंग के दौरान धुआं और धूल उत्पन्न होती है। पुराने उपकरण, अपर्याप्त धुआं-निकासी व्यवस्था, आंतरिक सड़कों की धूल, स्क्रैप हैंडलिंग और प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली को बायपास कर उत्सर्जन जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पंकजा मुंडे ने कहा कि प्रदूषण की समस्या को वर्षों तक लंबित नहीं रखा जा सकता। उद्योग बंद करना अंतिम विकल्प है, लेकिन उद्योगों को अपने लाभ का एक हिस्सा तकनीकी आधुनिकीकरण में निवेश करना चाहिए। उन्होंने स्क्रैप के आकार को नियंत्रित करने, उसका नियमित और सुरक्षित फीडिंग सिस्टम विकसित करने, उत्पादन क्षेत्रों की अनावश्यक खुली जगहों को बंद करने, शेड के भीतर उचित प्रेशर बनाए रखने तथा प्राथमिक और द्वितीयक धुआं-निकासी हुड की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां तकनीकी या स्थान संबंधी सीमाओं के कारण कोई उपाय संभव न हो, वहां उद्योग विशेषज्ञ संस्थानों से व्यवहार्य विकल्प तैयार कर प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण से मंजूरी लें। मंत्री ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल को प्रत्येक उद्योग की अलग-अलग जांच और ऑडिट करने के निर्देश दिए। धुआं रिसाव, खराब मशीनरी, शेड में खुली जगह, प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली को दरकिनार करने वाले मार्ग और धूल नियंत्रण की कमियों का उद्योगवार रिकॉर्ड तैयार कर वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट देने को कहा गया। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक उद्योग के लिए अलग उपाय और समयसीमा तय की जाएगी। मुंडे ने स्पष्ट किया कि तय अवधि में वास्तविक प्रगति करने वाले उद्योगों के मामले में जरूरत के अनुसार समय बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाने वाले उद्योगों को अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र की आंतरिक सड़कों को मजबूत करने, नियमित पानी का छिड़काव करने और वाहनों के पहियों से फैलने वाली धूल रोकने के लिए तत्काल व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
CSR फंड से प्रदूषण कम करने पर जोर
पंकजा मुंडे ने कहा कि उद्योग केवल कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं या औपचारिक गतिविधियों पर CSR निधि खर्च न करें। इस राशि का उपयोग प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, पर्यावरण संरक्षण, जलसंरक्षण और औद्योगिक क्षेत्र के सुधार में किया जाना चाहिए।
उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में खराब सड़कों की मरम्मत, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, जलसंरक्षण, नदी-नालों की गहराई और चौड़ाई बढ़ाने तथा स्थानीय नागरिकों के लिए श्वसन संबंधी स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने का सुझाव भी दिया। उद्योग प्रतिनिधियों ने बैठक में बताया कि प्रदूषण कम करने के लिए कुछ इकाइयां IIT मुंबई, IIT दिल्ली और IIT कानपुर के विशेषज्ञों से तकनीकी चर्चा कर रही हैं। कुछ उद्योगों में धुआं-निकासी प्रणाली की क्षमता बढ़ाने और सेकेंडरी हुड के आधुनिकीकरण का काम भी शुरू हो चुका है। मंत्री ने कहा कि उद्योगों द्वारा किए जा रहे उपायों और वास्तविक प्रगति की समीक्षा के लिए एक महीने बाद फिर बैठक आयोजित की जाएगी।
