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महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, होम्योपैथ डॉक्टरों को मॉडर्न दवाएं लिखने की अनुमति का विरोध

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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा होम्योपैथी डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में पंजीकरण और विशेष प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (CCMP) पूरा करने के बाद आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिखने की अनुमति दिए जाने के विरोध में राज्यभर के रेजिडेंट डॉक्टरों ने 5 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है। विरोध का कारण 30 जून को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा जारी वह अधिसूचना है, जिसमें बीएचएमएस (BHMS) डिग्रीधारी और Certificate Course in Modern Pharmacology (CCMP) पूरा कर चुके होम्योपैथी चिकित्सकों को एमएमसी में पंजीकरण की अनुमति दी गई है। इसके बाद वे निर्धारित प्रावधानों के तहत आधुनिक दवाएं लिख सकेंगे। MARD ने मांग की है कि जब तक यह मामला न्यायालय में लंबित है और उस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इस नीति को लागू नहीं किया जाए। संगठन का कहना है कि किसी भी नई चिकित्सा नीति को लागू करने से पहले उसका कानूनी, वैज्ञानिक और नियामकीय परीक्षण आवश्यक है। सेंट्रल MARD के अध्यक्ष डॉ. अथर्व शिंदे ने बताया कि हड़ताल 5 अगस्त की आधी रात से शुरू हुई है। मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले 24 घंटे तक आपातकालीन और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रखी गई हैं। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द बातचीत शुरू नहीं करती, तो 24 घंटे बाद आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। MARD के अनुसार बुधवार से राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं, नियमित क्लिनिकल कार्य, इलेक्टिव सर्जरी और शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित कर दी गई हैं। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े गंभीर नीतिगत मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। MARD की मांग है कि जब तक BHMS-CCMP व्यवस्था के लिए कानूनी रूप से मजबूत, पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार वाला नियामकीय ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक इसके तहत न तो पंजीकरण किया जाए और न ही इसे लागू किया जाए। संगठन ने सरकार से रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबे समय से लंबित मांगों, जिनमें सेवा शर्तें, कार्य परिस्थितियां और अन्य प्रशासनिक समस्याएं शामिल हैं, पर भी तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। इस आंदोलन को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), BMC MARD, महाराष्ट्र स्टेट मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ गैजेटेड मेडिकल ऑफिसर्स (ग्रुप-ए), एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स तथा महाराष्ट्र स्टेट रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन सहित कई प्रमुख चिकित्सा संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ है। MARD ने घोषणा की है कि यदि सरकार ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की, तो 6 अगस्त से आपातकालीन एवं कैजुअल्टी सेवाओं सहित सभी चिकित्सा सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। संगठन ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी चिकित्सा पद्धति या चिकित्सकों के खिलाफ नहीं है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में वैज्ञानिक एवं कानूनी मानकों को बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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