
मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का वास्तविक अर्थ एक समावेशी भारत है, जिसमें दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण विकास की आधारशिला है। उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी विभागों से दिव्यांगजनों के लिए रोजगार एवं कौशल प्रशिक्षण के अधिक अवसर उपलब्ध कराने तथा उनके लिए अनुकूल और समावेशी वातावरण तैयार करने का आह्वान किया। शुक्रवार को राज्यपाल मुंबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित ‘सार्थक एजुकेशन ट्रस्ट’ के 18वें स्थापना दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही प्रगति दिव्यांगजनों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है। हालांकि, प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब उसमें करुणा, मानवीय संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का समावेश हो। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2016 में लागू दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम ने विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं से ग्रसित नागरिकों को उनके अधिकारों की प्रभावी कानूनी सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 2.68 करोड़ तथा महाराष्ट्र में लगभग 30 लाख दिव्यांगजन हैं। राज्य सरकार स्वरोजगार, पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और ‘सुगम’ पोर्टल जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनके कल्याण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों का समावेशी विकास केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने दिव्यांगजनों को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘सार्थक एजुकेशन ट्रस्ट’ द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और वर्ष 2027 में फिनलैंड में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता में भाग लेने वाले भारतीय दिव्यांग प्रतिभागियों को शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव लव वर्मा ने सुझाव दिया कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि में दिव्यांगजनों के लिए पृथक उप-कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुल सीएसआर व्यय का कम-से-कम दो प्रतिशत हिस्सा दिव्यांगजन कल्याण के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में प्रसिद्ध दूरदर्शन कार्यक्रम ‘सुरभि’ के प्रस्तोता एवं ‘सार्थक’ के सलाहकार सिद्धार्थ काक ने दिव्यांगजनों के लिए विश्वस्तरीय कौशल प्रतियोगिताओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि एबिलिम्पिक्स जैसी प्रतियोगिताओं के लिए प्रत्येक जिले से प्रतिभागियों का चयन किया जाए, जिससे दिव्यांगजनों की प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच मिल सके तथा समाज में उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो। ‘सार्थक एजुकेशन ट्रस्ट’ के संस्थापक डॉ. जितेंद्र अग्रवाल ने कहा कि लगभग 20 वर्ष पहले दृष्टि खोने के बाद उन्होंने ‘सार्थक’ की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि आज कॉरपोरेट, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और ई-कॉमर्स सहित अनेक क्षेत्रों में दिव्यांगजनों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं और कई संस्थानों ने अपने कार्यस्थलों को अधिक समावेशी बनाया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दिव्यांगजनों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी भागीदार बनाया जाए। इसके लिए उन्हें सीएसआर समितियों और विभिन्न संस्थानों के निदेशक मंडलों में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। डॉ. अग्रवाल ने यह भी घोषणा की कि प्रशिक्षित दिव्यांग पेशेवरों की बढ़ती मांग को देखते हुए ‘सार्थक’ दिव्यांगजनों के कौशल विकास के लिए एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय की स्थापना करने जा रहा है। समारोह के दौरान राज्यपाल ने दिव्यांगजनों द्वारा तैयार उत्पादों और उनके कौशल प्रदर्शन का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, मुंबई की निदेशक प्रिया पानसरे, संगीता जैन, नेशनल एबिलिम्पिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में दिव्यांग युवक-युवतियां उपस्थित रहे।



