छह राज्यों में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर ऐतिहासिक समझौता, केंद्र उठाएगा 90% खर्च

टोंस नदी पर बनेगा 232.6 मीटर ऊंचा बांध; 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई, 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली का दावा, दिल्ली और यमुना को भी मिलेगा अतिरिक्त पानी

नई दिल्ली। करीब तीन दशक से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। मंगलवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा ने परियोजना से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्र सरकार ने किशाऊ को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है और इसके करीब 90 प्रतिशत वित्तीय भार को केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि भागीदार राज्यों द्वारा 1994 के समझौते के अनुरूप वहन की जाएगी। समझौते पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सचिव और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद रहे। अमित शाह ने समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि परियोजना पूरी होने पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली किसी न किसी रूप में लाभान्वित होंगे। उन्होंने छह राज्यों के एक मंच पर सहमत होकर समझौता करने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
टोंस नदी पर बनेगा 232.6 मीटर ऊंचा बांध
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा। इसमें करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण किया जा सकेगा। सरकार के मुताबिक परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी और लगभग 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन होगा। शाह ने कहा कि परियोजना से दिल्ली को विशेष रूप से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली और यमुना के लिए महत्वपूर्ण होगा पानी
अमित शाह ने कहा कि यमुना के पानी के पुराने बंटवारे के दौरान नदी के पर्यावरणीय प्रवाह का पर्याप्त प्रावधान नहीं किया गया था। उपलब्ध पानी राज्यों के बीच बांट दिया गया, जिससे नदी के लिए आवश्यक प्रवाह की चुनौती बनी रही। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना से उपलब्ध होने वाला अतिरिक्त पानी दिल्ली के साथ यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह के लिए भी लाभकारी होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण और यमुना की स्वच्छता के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। शाह ने कहा कि दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यमुना की सफाई के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने यमुना की स्वच्छता को गंगा की स्वच्छता से जोड़ते हुए कहा कि प्रयागराज में यमुना गंगा में मिलती है, इसलिए यमुना को स्वच्छ किए बिना गंगा की पूर्ण स्वच्छता का लक्ष्य भी अधूरा रहेगा।
1994 के समझौते से खुला परियोजना का रास्ता
गृह मंत्री के अनुसार 12 मई 1994 को यह व्यवस्था बनी थी कि यमुना बेसिन में आने वाली प्रत्येक भंडारण परियोजना के लिए अलग-अलग समझौते किए जाएंगे। वर्ष 2019 में लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं से जुड़े विवादों के समाधान के बाद किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला। इस वर्ष 16 जून को परियोजना पर औपचारिक सहमति बनी और इसके बाद जल शक्ति मंत्रालय ने तकनीकी, आर्थिक और राज्यों के हितों से जुड़े विषयों पर बातचीत आगे बढ़ाई। शाह ने कहा कि 2018 के बाद लखवार, शाहपुर कंडी, रेणुकाजी, केन-बेतवा लिंक और संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल रिवर लिंक सहित विभिन्न जल परियोजनाओं और अंतरराज्यीय मुद्दों पर समझौते हुए हैं। उन्होंने इसे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग का परिणाम बताया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि परियोजना से पेयजल, सिंचाई, औद्योगिक जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने सभी छह राज्यों से परियोजना को समझौते की भावना के अनुरूप मिलकर तेजी से पूरा करने का आह्वान किया।

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