
मुंबई। केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक ने कहा कि केंद्र सरकार नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, विद्युत बैटरी संचय प्रणाली पर निर्णय लेने, बिजली वितरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने, स्मार्ट मीटर स्थापित करने जैसे मुद्दों पर समयबद्ध उपाय करेगी। सह्याद्री अतिथिगृह में बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता और संबंधित विषयों पर मंत्री समूह समिति की दूसरी बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, तमिलनाडु के ऊर्जा मंत्री वी. सेंथिल बालाजी, मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टीपति रवि कुमार, राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री सोमेंद्र तोमर सहित अन्य मंत्री उपस्थित थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को उदय योजना जैसी योजनाएं फिर से शुरू करनी चाहिए, वित्तीय सहायता पर ब्याज दरें कम करनी चाहिए और महावितरण को ब्याज मुक्त बॉन्ड जारी करने की अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महावितरण देश की सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनी है, जिसका वार्षिक राजस्व 1.12 लाख करोड़ रूपए से अधिक है, जिसमें से 49 प्रतिशत राजस्व उद्योगों से प्राप्त होता है। श्री नाईक ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में बिजली क्षेत्र में 16.28 रूपए की कुल हानि हुई है। इस नुकसान को कम करने के लिए महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और गुजरात को अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने की जरूरत है। बिजली वितरण में एआई और आधुनिक तकनीक का उपयोग, सरकारी विभागों द्वारा समय पर बिल भुगतान, स्मार्ट मीटर की स्थापना, टैरिफ की नियमित समीक्षा, समय-आधारित बिजली दर लागू करना और वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना के तहत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है, जिससे बिजली वितरण हानि कम होगी और बिजली दरें घटेंगी। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी घरों में सौर ऊर्जा पहुंचाई जाएगी, जिससे लगभग 30 लाख घरों को लाभ मिलेगा। राज्य सरकार ने 2024-25 के वित्तीय वर्ष में 7.5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली देने का निर्णय लिया है। सरकार वर्तमान में 47 लाख कृषि पंपों के बिजली बिल का भुगतान सीधे महावितरण को कर रही है। मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत 16,000 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना शुरू की गई है, जिससे महाराष्ट्र के सभी 47 लाख कृषि पंप 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा से संचालित होंगे और महावितरण के बिजली खरीद खर्च में बड़ी बचत होगी।
महावितरण ने 66,000 करोड़ रूपए की बिजली खरीद लागत में बचत का प्रस्ताव महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग को सौंपा है और अगले पांच वर्षों में बिजली दरों को चरणबद्ध तरीके से कम करने की योजना भी प्रस्तुत की है। इस बैठक में पावर फाइनेंस कमिशन, प्रयास, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के ऊर्जा विभागों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी गईं। बैठक में अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) आभा शुक्ला, मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रधान सचिव अश्विनी भिड़े, महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्रा, महापारेषण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. संजीव कुमार, महानिर्मिती के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. राधाकृष्णन बी. सहित केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।




