
मंत्री पंकजा मुंडे ने आठ दिन में मांगी राज्य के औद्योगिक सांडपानी शोधन संयंत्रों की रिपोर्ट
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने कोल्हापुर जिले की पंचगंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए सामूहिक औद्योगिक सांडपानी शोधन संयंत्र (सीईटीपी) परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन तथा पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने संबंधित स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को परियोजनाओं में हुई देरी का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री मुंडे ने कहा कि कोल्हापुर सहित राज्य के सभी औद्योगिक क्षेत्रों, रेड जोन, चीनी मिलों और प्रदूषित क्षेत्रों में संचालित सीईटीपी परियोजनाओं की वास्तविक क्षमता, उपयोग तथा उनसे जुड़े औद्योगिक इकाइयों की स्थिति की जांच कर आठ दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। बैठक में नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ, विधायक अमल महाडिक, राहुल आवाडे, पर्यावरण विभाग की सचिव जयश्री भोज, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव राहुल रेखावार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं विधायक राजेंद्र पाटील यड्रावकर, पूर्व सांसद राजू शेट्टी और कोल्हापुर महानगरपालिका आयुक्त राजेंद्र भारूड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
पंचगंगा नदी के प्रदूषण पर विस्तृत समीक्षा
बैठक में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पंचगंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण की स्थिति की जानकारी दी। कोल्हापुर शहर, इचलकरंजी, आसपास की नगरपालिकाओं, ग्राम पंचायतों और औद्योगिक क्षेत्रों से नदी में छोड़े जा रहे सांडपानी की भी समीक्षा की गई।
पाइपलाइन और सीईटीपी परियोजनाएं साथ-साथ हों पूरी
पंकजा मुंडे ने कहा कि प्रस्तावित नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण के कार्यों में पंचगंगा नदी को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) द्वारा स्वीकृत सीईटीपी परियोजनाओं का यांत्रिकीकरण तथा उनसे जुड़ी पाइपलाइन का कार्य समानांतर रूप से पूरा किया जाए। उन्होंने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को संबंधित एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी कर उसकी प्रति उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।
सिर्फ शोधन नहीं, अंतिम निस्तारण पर भी होगी निगरानी
मंत्री मुंडे ने कहा कि केवल सांडपानी का उपचार पर्याप्त नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उपचारित पानी खेतों, नालों या अन्य माध्यमों से दोबारा नदी में न पहुंचे। इसके लिए उपचारित पानी के अंतिम निस्तारण, परिवहन के दौरान होने वाले रिसाव और अवैध डिस्चार्ज पर भी प्रभावी निगरानी रखी जाए।
कोल्हापुर के एसटीपी जल्द पूरे करने के निर्देश
उन्होंने कोल्हापुर महानगरपालिका के अधीन निर्माणाधीन चार सांडपानी शोधन परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही परिधीय शहरी गांवों में सांडपानी प्रबंधन के लिए संबंधित विभागों की अलग बैठक बुलाकर समन्वित योजना तैयार करने की बात कही। मंत्री ने बताया कि पंचगंगा नदी प्रदूषण के मुद्दे पर अगले सप्ताह कोल्हापुर में विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
राज्यमंत्री मिसाळ ने भी जताई चिंता
नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ ने कहा कि कई सांडपानी शोधन संयंत्रों से निकलने वाले उपचारित पानी की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। इसलिए राज्य के सभी सीईटीपी संयंत्रों की गुणवत्ता, उनकी वास्तविक क्षमता और बिना उपचार के सीधे नदियों में छोड़े जा रहे औद्योगिक अपशिष्ट का सर्वेक्षण कराया जाना आवश्यक है। बैठक में विधायक अमल महाडिक, राहुल आवाडे, राजेंद्र पाटील यड्रावकर तथा पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने भी पंचगंगा नदी के प्रदूषण को लेकर अपने सुझाव और चिंताएं रखीं।

