
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया जोर
मुंबई। महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने राज्य के सभी स्वयंअर्थसहाय्यित (सेल्फ-फाइनेंस्ड) विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा विभाग की स्थापना करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मंगलवार को डॉ. होमी भाभा स्टेट यूनिवर्सिटी में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री पाटील ने राज्य के स्वयंअर्थसहाय्यित विश्वविद्यालयों के प्रायोजक मंडलों के अध्यक्षों और कुलपतियों के साथ विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों की समीक्षा की। बैठक में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी, उच्च शिक्षा निदेशक शैलेंद्र देवळाणकर, उप सचिव प्रताप लुबाळ, अमोल मुत्याल, तकनीकी शिक्षा निदेशक प्रमोद नाईक, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
बैठक में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम और इंटर्नशिप व्यवस्था के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। मंत्री पाटील ने निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय एआईएसएचई (AISHE) पोर्टल पर जीईआर और जीपीआर से संबंधित जानकारी नियमित रूप से अपडेट करें तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के डैशबोर्ड पर भी आवश्यक आंकड़े समय-समय पर दर्ज करें।
एनएएसी, एनबीए और एनआईआरएफ रैंकिंग पर विशेष ध्यान
मंत्री ने विश्वविद्यालयों से कहा कि वे एनएएसी (NAAC) और एनबीए (NBA) मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं तथा एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों का अपार (APAAR) आईडी बनाकर उसे अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) से शत-प्रतिशत जोड़ने तथा राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के संबंधित पोर्टलों पर विद्यार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
वैधानिक समितियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा
बैठक में महाराष्ट्र स्वयंअर्थसहाय्यित विश्वविद्यालय (स्थापना एवं विनियमन) अधिनियम के तहत विश्वविद्यालयों की नियामक परिषद, प्रबंधन परिषद, शैक्षणिक परिषद और परीक्षा मंडल की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। इन समितियों की नियमित बैठकें, निर्णय प्रक्रिया और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। बैठक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराने के लिए 10 प्रतिशत विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत शुल्क रियायत देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा कि विश्वविद्यालयों को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए विद्यार्थी हित में आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित की जा सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी ने विश्वविद्यालयों को अपने वार्षिक प्रतिवेदन समय पर प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।

