विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
‘सुशासन संवाद-मुंबई संकल्प’ में बोले— सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही सुशासन का मूल आधार

मुंबई। ‘विकसित भारत 2047’ केवल आर्थिक प्रगति की अवधारणा नहीं, बल्कि समृद्ध, सक्षम, सर्वसमावेशी, तकनीकी रूप से उन्नत और अपनी सभ्यता-संस्कृति के प्रति आत्मविश्वास रखने वाले भारत की परिकल्पना है। सरकारी निर्णयों, योजनाओं और सेवाओं का प्रभावी लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और उसे सशक्त बनाना ही सुशासन का मूल आधार है। बुधवार को यह बात राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने पांचजन्य की ओर से मुंबई के ताज महल पैलेस में आयोजित ‘सुशासन संवाद-मुंबई संकल्प’ कार्यक्रम में कही। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य रखा है और इस अवधारणा का केंद्र अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने इसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ दर्शन से जोड़ते हुए कहा कि शासन की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें, उसे शक्ति मिले और उसका जीवन स्तर बेहतर हो, यही वास्तविक सुशासन है। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ को सर्वसमावेशी विकास का मंत्र बताते हुए भारतीय विचार परंपरा के ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना और शासन तथा समाज का मिलकर विकास के लिए काम करना भारतीय लोकतंत्र की मूल दिशा है। राज्यपाल ने सुशासन जैसे विषय पर विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर संवाद का अवसर उपलब्ध कराने के लिए पांचजन्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्क्रीन प्रधान वर्तमान दौर में भी मुद्रित शब्द की अपनी विश्वसनीयता और प्रभाव कायम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पांचजन्य के इस संवाद से निकलने वाला ‘मुंबई संकल्प’ सुशासन और राष्ट्रीय विकास की दिशा में ठोस कार्रवाई के लिए नए विचार और प्रेरणा देगा। कार्यक्रम में भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण कुमार गोयल, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा का सम्मान भी किया गया।
