
मुंबई। श्रीक्षेत्र ज्योतिबा मंदिर और उसके आसपास के पहाड़ी क्षेत्र के विकास कार्य पर्यावरणीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर किए जाएँ, ऐसे निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिए। कोल्हापुर जिले में स्थित यह प्रसिद्ध धार्मिक स्थल राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगभग 250 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इसमें से 80 करोड़ रुपये के कार्य पहले ही शुरू हो चुके हैं। विधान भवन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित शिखर समिति की बैठक में शेष 170 करोड़ रुपये के संशोधित विकास कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई। गुरुवार को हुई बैठक में उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, वन मंत्री गणेश नाईक, पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई, नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ज्योतिबा पहाड़ी क्षेत्र के विकास के दौरान बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाए और पहले लगाए गए पेड़ों के जीवित रहने का प्रतिशत बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली को प्रभावी बनाया जाए। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अन्नदान करते हैं, इसलिए एक आधुनिक और सुव्यवस्थित अन्नछत्रालय का निर्माण किया जाएगा, जिसमें अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था उपलब्ध होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी क्षेत्र के पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए आसपास की बस्तियों में उचित सीवेज और अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए स्वच्छता के लिए सख्त योजना लागू की जाएगी। साथ ही नियमानुसार वन भूमि का हस्तांतरण कर मंदिर परिसर के विकास को आगे बढ़ाया जाएगा। कोल्हापुर के जिलाधिकारी अमोल येडगे ने बैठक में विकास आराखड़े की विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रस्तावित योजना में ज्योतिबा पहाड़ी की पुरानी पगडंडियों की मरम्मत और चौड़ीकरण, परियोजनाओं से प्रभावित पेड़ों का पुनरोपण, सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष, पुलिस कक्ष और देवस्थान प्रबंधन कार्यालय की स्थापना जैसे कार्य शामिल हैं। इसके अलावा यमाई देवी मंदिर परिसर में सुविधा केंद्र का निर्माण, दक्षिण द्वार प्रवेश मार्ग की मरम्मत, ऐतिहासिक शाहूकालीन हुजूरवाड़ा इमारत का संरक्षण और कुशीरे से गायमुख लेक तक पार्किंग सहित पैदल मार्ग का विकास भी प्रस्तावित है। योजना के अंतर्गत 5 मेगावाट क्षमता का विद्युत उपकेंद्र और सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की जाएगी। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए आवास व्यवस्था, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा केंद्र, अन्नछत्र और वाडी रत्नागिरी गांव में स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था विकसित की जाएगी। इस विकास योजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना और साथ ही ज्योतिबा पहाड़ी क्षेत्र के पर्यावरणीय महत्व को सुरक्षित रखना है।




