उज्जैन के रेस्टोरेंट में जहरीली गैस से दम घुटने पर चार कर्मचारियों की मौत
फूड वेस्ट टैंक की सफाई के दौरान हुआ हादसा, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता

उज्जैन, मध्य प्रदेश। देवास रोड स्थित श्री गंगा रेस्टोरेंट में फूड वेस्ट टैंक की सफाई के दौरान चार कर्मचारियों की मौत के मामले में रविवार को पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी। सुबह फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर चैंबर से जरूरी साक्ष्य जुटाए। वहीं, चारों मृतकों के शवों का जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 10:30 बजे टैंक में जाम होने के कारण सफाई का काम किया जा रहा था। इसी दौरान एक कर्मचारी चैंबर में फंस गया। उसे बचाने के लिए एक-एक कर तीन अन्य कर्मचारी भी अंदर उतरे, लेकिन जहरीली गैस और दम घुटने के कारण चारों बाहर नहीं निकल सके। सूचना मिलने पर माधव नगर पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचा। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। चैंबर का गेट नहीं खुलने पर कटर मशीन से उसे काटा गया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद चारों कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। पुलिसकर्मियों ने सीपीआर देकर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे में कमलेश और नितिन निवासी वाल्मीकि नगर, वाहिद निवासी सोमवारिया तथा मनोज निवासी झालावाड़ की मौत हुई है। रेस्क्यू के दौरान एसआई धर्मेंद्र सिंह तोमर, आरक्षक संतोष और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी है। वहीं, सफाईकर्मी हेमराज समय रहते चैंबर से बाहर निकल आया था।
सुरक्षा मानकों और प्रबंधन की भूमिका की जांच
पुलिस यह पता लगा रही है कि कर्मचारियों को टैंक में उतारने से पहले गैस की जांच की गई थी या नहीं और उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। रेस्टोरेंट प्रबंधन की भूमिका और संभावित लापरवाही की भी पड़ताल की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पुष्टि होगी।
मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख की सहायता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि हादसे में चार लोगों की मौत का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री ने राज्य शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं।
