
मुंबई/के. रवि (दादा)। एयरलाइन में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का मुंबई पुलिस की मानखुर्द पुलिस ने पर्दाफाश किया है। उत्तराखंड के देहरादून में संचालित एक हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती के मार्गदर्शन तथा पुलिस उपायुक्त समीर शेख के नेतृत्व में की गई। मामले की जानकारी देते हुए पुलिस उपायुक्त समीर शेख ने मीडिया को बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और देशभर के बेरोजगार युवाओं को एयर इंडिया सहित अन्य एयरलाइंस में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये की ठगी करता था। जांच की शुरुआत 27 फरवरी 2026 को हुई, जब पीड़िता ज्योति राऊत ने मानखुर्द पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि एयर इंडिया में नौकरी दिलाने के नाम पर उससे करीब 2.60 लाख रुपये ठग लिए गए। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन, बैंकिंग लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की, जिसके बाद इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि गिरोह उत्तराखंड के देहरादून से एक हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। कॉल सेंटर में कार्यरत आरोपी खुद को एयर इंडिया, अन्य एयरलाइंस या सरकारी भर्ती एजेंसियों का अधिकारी बताकर देशभर के बेरोजगार युवाओं को फोन करते थे और उन्हें आकर्षक वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन, मेडिकल टेस्ट, दस्तावेज सत्यापन, यूनिफॉर्म, ट्रेनिंग और सिक्योरिटी डिपॉजिट जैसे विभिन्न शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस उपायुक्त समीर शेख के नेतृत्व तथा वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बिलाल शेख के मार्गदर्शन में गठित विशेष टीम ने देहरादून पहुंचकर छापेमारी की, जहां से पूरे देश में ठगी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश और नागालैंड के निवासी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, डिजिटल डिवाइस, बैंकिंग रिकॉर्ड, फर्जी नियुक्ति पत्र, दस्तावेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि गिरोह तकनीकी रूप से बेहद संगठित तरीके से ठगी को अंजाम दे रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने नागालैंड के कुछ शिक्षित युवाओं को उनकी अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ होने के कारण नौकरी पर रखा था, ताकि विदेशी नागरिकों को भी निशाना बनाया जा सके। इन कर्मचारियों को मासिक वेतन दिया जाता था और पूरा कॉल सेंटर एक वैध कॉर्पोरेट कार्यालय की तरह संचालित किया जाता था, जबकि वास्तव में यह संगठित साइबर ठगी का अड्डा था। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने देश के विभिन्न राज्यों में सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाया है और करोड़ों रुपये की ठगी की है। फिलहाल मानखुर्द पुलिस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड, ठगी की कुल रकम, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन तथा इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच जारी है तथा संभावना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि किसी भी निजी संस्था या एयरलाइन में नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वालों से सतर्क रहें और किसी भी भर्ती प्रक्रिया में भुगतान करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से जानकारी अवश्य सत्यापित करें।



