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जालना की जिला परिषद स्कूलों की सुविधाओं की होगी जांच, 5 सितंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश

पंकजा मुंडे ने कहा- मंजूर राशि खर्च नहीं हुई तो तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी, आदर्श स्कूल और आधुनिक लाइब्रेरी का बनेगा खाका

मुंबई। जालना जिले के जिला परिषद स्कूलों में कक्षाओं, शौचालयों, पेयजल व्यवस्था, कंपाउंड वॉल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मौजूदा स्थिति की जांच कर 5 सितंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जिले की पालकमंत्री तथा पशुसंवर्धन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने दिए हैं। उन्होंने जिले में शिक्षा सुविधाओं का स्तर सुधारने के लिए आदर्श स्कूल, आंगनवाड़ी, आधुनिक पुस्तकालय और खेल मैदानों के विकास की व्यापक योजना तैयार करने को भी कहा है। मंगलवार को पंकजा मुंडे ने मंत्रालय से ऑनलाइन बैठक के जरिए जिला परिषद स्कूलों में नई कक्षाओं के निर्माण, पुरानी कक्षाओं की मरम्मत और ‘जालनाई सिल्क’ की ब्रांडिंग सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की। बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष्णकांत कनवारिया, जालना महानगरपालिका आयुक्त अंजली शर्मा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। मुंडे ने स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए शौचालय, स्वच्छ पेयजल, नई कक्षाओं के निर्माण और पुरानी कक्षाओं की मरम्मत की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली।
मंजूर राशि खर्च नहीं हुई तो अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी
पालकमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिला परिषद स्कूलों, आंगनवाड़ियों और ग्राम पंचायत कार्यालयों की इमारतों की स्थिति, आवश्यक मरम्मत, उपलब्ध धनराशि और लंबित कार्यों की समीक्षा की जाए। राशि मंजूर होने के बावजूद टेंडर या प्रशासनिक प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण धनराशि खर्च नहीं होना स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने जिले में स्कूलों के डिजिटलाइजेशन और आदर्श स्कूल योजना के लिए उपलब्ध धनराशि से अधिक से अधिक मौजूदा स्कूलों का स्तर सुधारने पर जोर दिया। स्कूलों में रंग-रोगन, जरूरी मरम्मत, बच्चों के अनुकूल सजावट, डिजिटल कक्षाएं, गुणवत्तापूर्ण बेंच, पुस्तकें और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
स्कूलों से मिले सामाजिक समरसता का संदेश
पंकजा मुंडे ने कहा कि स्कूलों की दीवारों पर बनाए जाने वाले चित्र और संदेश केवल सजावट तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इनके माध्यम से विद्यार्थियों में समानता, सामाजिक सद्भाव, समावेशिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होना चाहिए। पंचतंत्र की कहानियों, संतों और महापुरुषों के विचारों, प्रेरणादायक प्रसंगों तथा सामाजिक एकता का संदेश देने वाले चित्रों को इसमें शामिल किया जाए। स्कूलों में उपलब्ध खेल मैदानों को अनुपयोगी नहीं छोड़ा जाए। मैदानों में आवश्यक व्यवस्था कर खो-खो, कबड्डी, मल्लखंब और बैडमिंटन जैसे खेलों की सुविधाएं विकसित करने को कहा गया है। इसके अलावा स्कूल परिसरों में तंबाकू या शराब का सेवन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला परिषद को विशेष टीम बनाकर समय-समय पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। मुंडे ने कहा कि आदर्श स्कूल में विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, किचन गार्डन, सुरक्षित हरित बाड़, वृक्षारोपण, सीसीटीवी व्यवस्था और निर्बाध बिजली आपूर्ति होनी चाहिए। डिजिटल कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को ऑनलाइन मार्गदर्शन और इंटरैक्टिव शिक्षा की सुविधा भी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी और जिला परिषद स्कूलों से व्यावसायिक दर पर बिजली बिल वसूले जाने से उनके सीमित अनुदान पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसलिए आंगनवाड़ी और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अलग या रियायती बिजली दर लागू करने के संबंध में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया जाएगा।
महानगरपालिका स्कूल और आधुनिक लाइब्रेरी का बनेगा प्लान
जालना महानगरपालिका के अंतर्गत वर्तमान में 16 स्कूल हैं। पालकमंत्री ने विद्यार्थियों की संख्या, स्कूल भवनों की स्थिति, झुग्गी एवं वंचित बस्तियों की लोकेशन और विद्यार्थियों को स्कूल तक पहुंचने में लगने वाले समय का अध्ययन कर स्कूलों के सुधार की योजना बनाने के निर्देश दिए। महानगरपालिका क्षेत्र में विकसित किए जाने वाले पुस्तकालयों को पारंपरिक स्वरूप तक सीमित न रखते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नियमित पाठकों की जरूरतों के अनुसार आधुनिक बनाने को कहा गया है। इनमें अलग अध्ययन कक्ष, ओपन रीडिंग एरिया, कंप्यूटर और लैपटॉप सुविधा, ऑनलाइन मार्गदर्शन तथा रिसर्च सेक्शन विकसित करने के निर्देश दिए गए।
‘जालनाई सिल्क’ को मिलेगी अलग पहचान
पंकजा मुंडे ने ‘जालनाई सिल्क’ की ब्रांडिंग पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने जालना के रेशम उत्पादों को बाजार में अलग पहचान दिलाने के लिए तीन से पांच विशिष्ट डिजाइन तैयार करने को कहा। डिजाइन में जालना की मौसंबी, स्थानीय पत्थर की जाली एवं स्थापत्य शैली तथा अजंता कला से प्रेरित तत्वों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए। इसके लिए पेशेवर ब्रांडिंग सलाहकार की मदद से उत्पाद की गुणवत्ता, कच्चा माल, बुनाई में लगने वाला समय, कारीगरों की मजदूरी, कीमत और बिक्री व्यवस्था को शामिल करते हुए विस्तृत बिजनेस प्लान तैयार किया जाएगा। शुरुआती चरण में मध्यमवर्गीय ग्राहकों की पहुंच में आने वाले गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में उतारकर ब्रांड के प्रति भरोसा पैदा करने और बाद में प्रीमियम उत्पादों की अलग श्रेणी विकसित करने की योजना है। मुंडे ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्पादों की कीमत तय करते समय बुनकरों और कारीगरों को उचित मेहनताना मिलना सुनिश्चित किया जाए।

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