महाराष्ट्र FDA में ‘वसूली’ का खेल? संजय राउत का तुकाराम मुंढे को कड़ा पत्र, स्वतंत्र जांच की मांग

‘क्लोजिंग नोटिस’ के नाम पर ₹10-12 हजार की कथित वसूली अब ₹75 हजार से ₹2 लाख तक पहुंचने का आरोप, ठाणे में लाइसेंस बहाल कराने के लिए ₹17-18 लाख वसूलने का दावा

मुंबई। महाराष्ट्र में मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने वाले खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कुछ अधिकारियों पर ही कथित वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को 27 सितंबर को पत्र लिखकर होटल, रेस्टोरेंट और क्विक-कॉमर्स कारोबारियों को लाइसेंस निलंबित करने का डर दिखाकर पैसे वसूलने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। राउत के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
राउत ने पत्र में मुंढे के नेतृत्व में मिलावटी और अस्वच्छ खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की सराहना भी की, लेकिन आरोप लगाया कि इसी सख्ती से पैदा हुए डर का कुछ अधिकारी कथित रूप से फायदा उठा रहे हैं। उनके मुताबिक मुंबई, ठाणे, नागपुर, पुणे, सोलापुर, वर्धा और छत्रपति संभाजीनगर के कारोबारियों ने ‘क्लोजिंग नोटिस’ के नाम पर कथित वसूली की शिकायतें उनसे की हैं।
₹10-12 हजार से ₹2 लाख तक पहुंचा ‘रेट’, राउत का आरोप
राउत ने दावा किया कि मुंढे के FDA आयुक्त बनने से पहले कथित तौर पर ‘क्लोजिंग नोटिस’ से जुड़े मामलों में ₹10 हजार से ₹12 हजार तक की रकम मांगी जाती थी, लेकिन अब यह कथित ‘रेट’ ₹75 हजार से ₹2 लाख तक पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि Designated Officers, Assistant Commissioners और Food Safety Officers में से कुछ कारोबारी प्रतिष्ठानों को लाइसेंस निलंबन का भय दिखाकर पैसे की मांग कर रहे हैं।
ठाणे में ₹17-18 लाख वसूलने का गंभीर आरोप
पत्र में ठाणे से जुड़ा एक मामला भी उठाया गया है। राउत ने आरोप लगाया कि वहां दो Designated Officers ने एक क्विक-कॉमर्स कंपनी का निलंबित लाइसेंस बहाल कराने के लिए ₹17 से ₹18 लाख कथित रूप से वसूले। उन्होंने इस आरोप की अलग से जांच कराने की मांग की है।
‘चूहा’ नहीं मिला, फिर भी लाइसेंस निलंबित करने का दावा
राउत ने FDA की कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी प्रतिष्ठान पर कार्रवाई करते समय निर्धारित नोटिस, सुधार का अवसर और सुनवाई की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में इस प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे लाइसेंस निलंबित करने का भय दिखाया जा रहा है।
उन्होंने एक होटल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि सोशल मीडिया पर भोजन में ‘चूहा’ होने संबंधी पोस्ट के आधार पर उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया, जबकि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को वहां चूहा नहीं मिला था। राउत ने यह सवाल भी उठाया कि ग्राहक शिकायतों के आधार पर होने वाली कार्रवाई से पहले यह स्वतंत्र रूप से क्यों नहीं जांचा जाता कि शिकायत असली है या फर्जी।
‘मुंढे इफेक्ट’ FDA कार्यालय में भी दिखाई दे: राउत
राउत ने मुंढे की कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए उनसे अपने विभाग के भीतर भी सफाई अभियान चलाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि बांद्रा स्थित FDA मुख्यालय की तीसरी मंजिल और ठाणे कार्यालय में कथित वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। राउत ने कहा कि ‘मुंढे इफेक्ट’ केवल होटल के किचन में नहीं, FDA कार्यालय में भी दिखाई देना चाहिए। राउत ने FDA आयुक्त से ‘क्लोजिंग नोटिस रेट कार्ड’ और निलंबित लाइसेंस बहाल किए जाने के मामलों की स्वतंत्र जांच, ग्राहक शिकायतों का अनिवार्य सत्यापन, निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार करने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा प्रत्येक लाइसेंस निलंबन और बहाली के कारण, तारीख और सुनवाई का सारांश सार्वजनिक करने की मांग की है। ठाणे के कथित ₹17-18 लाख के मामले की अलग जांच की मांग भी पत्र में की गई है। राउत ने इस मामले की ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी ध्यान आकर्षित किया है। अब इन गंभीर आरोपों पर FDA प्रशासन की जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल पत्र में लगाए गए वसूली के आरोप जांच में सिद्ध तथ्य नहीं हैं।

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