
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मातृभाषा के संरक्षण, समृद्ध इतिहास और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के संतुलन के साथ छात्र-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में नशामुक्ति से संबंधित विषयों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सोमवार को मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि पीजीआई 2.0 रैंकिंग में महाराष्ट्र देश में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। राज्य की पीएम श्री स्कूलों सहित अन्य विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है और शिक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे, राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर, प्रधान सचिव रणजीतसिंह देओल, शिक्षा आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विद्यार्थियों के आधार प्रमाणीकरण, आरटीई के तहत 35 लाख विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ, पवित्र पोर्टल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और अन्य प्रमुख शैक्षणिक योजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी स्कूलों में नशाविरोधी मार्गदर्शन एवं काउंसिलिंग समितियों के गठन तथा ‘ड्रग-फ्री स्कूल’ अभियान चलाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। साथ ही स्कूलों में सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव और मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए प्रभावी एवं कड़े उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य में वर्तमान में 1,08,065 स्कूलों में 2 करोड़ 20 लाख 48 हजार 443 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात 28:1 है। देश के कुल स्कूलों में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 9.34 प्रतिशत, शिक्षकों में 8.84 प्रतिशत और विद्यार्थियों में 7.69 प्रतिशत है। राज्य में 64,341 सरकारी, 29,486 अनुदानित निजी तथा शेष स्ववित्तपोषित एवं केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं। बैठक में निपुण महाराष्ट्र अभियान, राष्ट्र प्रथम अभियान, मुख्यमंत्री माझी शाळा सुंदर शाळा, शाला प्रवेशोत्सव, शिक्षकों के लिए एआई आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण, अध्ययन दौरे, सीएसआर सहयोग और ‘सुपर-100 योजना’ की भी समीक्षा की गई। इस योजना के तहत प्रत्येक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 100 मेधावी विद्यार्थियों को नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की उच्चस्तरीय तैयारी कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में विस्तृत स्थान मिला है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के पाठ्यक्रम में भी उनके इतिहास को और व्यापक रूप से शामिल किया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य सरकार ने एसएससी, सीबीएसई, आईसीएसई और आईबी सहित सभी शिक्षा बोर्डों के स्कूलों में मराठी भाषा का अध्ययन और मराठी विषय की परीक्षा अनिवार्य कर दी है।

