
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद के फूलपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां 85 वर्षीय वृद्धा रामराजी को कथित रूप से उनके बड़े बेटे ने घर से बाहर निकाल दिया। संपत्ति विवाद के चलते वृद्धा पिछले कई दिनों से अपने सामान के साथ घर के बाहर रहने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, रामराजी, खज्जीकीपट्टी बेलहाबाध गांव की निवासी हैं और उनके चार पुत्र हैं—त्रिलोकी नाथ, दीना नाथ, त्रिवेणी शंकर दुबे तथा राजा बाबू दुबे। परिवार के लोगों का कहना है कि पिछले लगभग 35 वर्षों से वृद्धा की देखभाल उनके तीसरे पुत्र त्रिवेणी शंकर दुबे द्वारा की जा रही है। बताया जाता है कि करीब 35 वर्ष पूर्व बड़े पुत्र त्रिलोकी नाथ गांव छोड़कर इंदौर चले गए थे। उस समय उन्होंने कथित रूप से 25 हजार रुपये नकद और 80 हजार रुपये की एफडी लेकर यह कहा था कि वे इंदौर में अपना जीवन बसाएंगे और गांव की संपत्ति से उनका कोई संबंध नहीं रहेगा। आरोप है कि 6 जून 2026 को त्रिलोकी नाथ अचानक गांव लौटे और मां से मकान खाली करने को कहा। जब वृद्धा ने उनसे पुराने समझौते और पहले ही अपना हिस्सा लेने की बात कही तो विवाद बढ़ गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस दौरान वृद्धा के साथ मारपीट की गई। उन्हें बचाने पहुंचे त्रिवेणी शंकर दुबे और अन्य लोगों को भी चोटें आईं। घटना के बाद बड़े बेटे ने उस मकान में ताला लगा दिया, जहां रामराजी पिछले 35 वर्षों से रह रही थीं। इसके चलते वृद्धा अपने सामान सहित घर के बाहर रहने को विवश हो गईं। परिवार का आरोप है कि भीषण गर्मी और लगभग 44 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच वृद्धा को खुले में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना की सूचना पुलिस हेल्पलाइन 112 पर दी गई थी, लेकिन तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में थाने में लिखित शिकायत दी गई। पुलिस ने दोनों पक्षों के दो-दो लोगों के खिलाफ शांति भंग की आशंका में कार्रवाई करते हुए बीएनएसएस की धारा 151 के तहत चालान किया और जमानत पर छोड़ दिया।
वृद्धा रामराजी और उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं और विपक्षी पक्ष दोबारा हमला करने की बात कह रहा है। उन्होंने प्रशासन से घर का ताला खुलवाने, रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। रामराजी ने शासन और प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा है कि जीवन के इस अंतिम पड़ाव में उन्हें अपने ही घर से बेघर होना पड़ा है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए और उनके रहने के अधिकार की रक्षा की जाए। फिलहाल मामला स्थानीय पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में है तथा आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।



