
नई दिल्ली। प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के क्षेत्रीय समिति सदस्य (आरसीएम) और 20 लाख रुपये के इनामी रविंद्र गंझू उर्फ सुरेंद्र की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता मान रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि गंझू की गिरफ्तारी से माओवादी संगठन की संचालन क्षमता को बड़ा झटका लगा है और अब अभियान अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सुरक्षा बलों के अनुसार, रविंद्र गंझू को 13 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उसने संगठन की गतिविधियों से जुड़ी कई अहम जानकारियां दी हैं। जांच में सामने आया है कि वह शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कैडरों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहा था। वह गुरिल्ला ऑपरेशन, नई भर्ती, खुफिया जानकारी जुटाने, जबरन वसूली नेटवर्क और संगठन की राजनीतिक गतिविधियों का समन्वय करता था। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि गंझू को माओवादी ठिकानों, रसद व्यवस्था और नेतृत्व नेटवर्क की विस्तृत जानकारी थी। उसकी गिरफ्तारी से संगठन की कमांड संरचना कमजोर होगी और शेष शीर्ष नेताओं तक पहुंचने में महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी मिलने की उम्मीद है। सुरक्षा एजेंसियां अब चार शीर्ष माओवादी नेताओं मिसिर बेसरा, असीम मंडल, गणपति (प्रत्येक पर 1 करोड़ रुपये का इनाम) तथा अजय महतो (25 लाख रुपये का इनामी) की तलाश में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन नेताओं की गिरफ्तारी या निष्क्रिय होने के बाद माओवादी संगठन की नेतृत्व क्षमता लगभग समाप्त हो जाएगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह ने कहा कि केवल एक गिरफ्तारी से खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। संगठन किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंप सकता है, लेकिन अनुभवी नेतृत्व लगातार कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सुरक्षा एजेंसियां रविंद्र गंझू से मिली खुफिया जानकारी का कितना प्रभावी उपयोग करती हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि देश में वामपंथी उग्रवाद लगभग समाप्ति की ओर है। इसी क्रम में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों द्वारा विभिन्न राज्यों में संयुक्त अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब रणनीति बड़े सैन्य अभियानों से आगे बढ़कर खुफिया आधारित निगरानी, क्षेत्रीय नियंत्रण और माओवादी गतिविधियों के दोबारा उभरने की संभावनाओं को रोकने पर केंद्रित है। गृह मंत्रालय के अनुसार, वर्षों से चल रहे संयुक्त अभियानों के कारण माओवादी संगठन की संरचना, हथियार क्षमता और समर्थन नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम जिला अभी भी वामपंथी उग्रवाद के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है, जहां सुरक्षा बल विशेष निगरानी बनाए हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियां माओवादियों के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने, छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी, नए आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित करने तथा दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने पर भी विशेष जोर दे रही हैं। हाल के दिनों में ओडिशा और छत्तीसगढ़ में कई अभियानों के दौरान भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और आईईडी बरामद किए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 अप्रैल को कोबरा बटालियन ने झारखंड के चतरा और हजारीबाग जिलों में संयुक्त अभियान चलाकर चार वरिष्ठ माओवादियों को मार गिराया था, जिनमें एक क्षेत्रीय समिति और एक जोनल समिति का सदस्य भी शामिल था।

