Friday, June 21, 2024
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संपादकीय:- करनाल पत्रकार की गिरफ्तारी क्यों?

हरियाणा के करनाल के पत्रकार आकर्षण उप्पल आईबीएन 24 में जर्नलिस्ट का काम करते हैं। पत्रकार का धर्म है जनता की परेशानियों को शासन प्रशासन तक ले जाकर समाधान कराएं। पत्रकार आकर्षण उप्पल तहसील में रजिस्ट्री ना होने से परेशान लोगों की समस्या को कवर करने के लिए पहुंचे थे। उन्हें देखते ही तहसीलदार मैडम वॉशरूम चली गई। इसके बाद आकर्षण उप्पल भी कैमरा लेकर उनके पीछे-पीछे अंदर बने कमरे तक चले गए। सैकड़ों फरियादियों। को बार-बार दौड़ाया जा रहा था। कोई काम नहीं कर रही थीं महिला तहसीलदार। फरियादियों ने खुद पत्रकार उप्पल को फोन करके बुलाया था। तहसीलदार वाश रूम में दुबक हैं जैसा बताया गया। पत्रकार ने दरवाजे पर दस्तक दी गेट खोलने पर साहिबा बाहर कार्यालय में आई। पत्रकार ने फरियादियों की भीड़ और उनको दौड़ाए जाने की बात कही।वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। जब पत्रकार टहलने गया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। तहसीलदार की रपट के बाद। यह तो उलटा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरितार्थ हो गई। बाद में पता लगा कि पत्रकार पर अनेक ऐसी धाराएं लगाई गईं कि उसे बेल नहीं मिले। मुख्यमंत्री खट्टर के संज्ञान में बात आई तो दिखाने के लिए पत्रकार को पुचकारा। युवा, पत्रकार, गृहस्थ किसान दुकानदार ने जगह जगह प्रदर्शन किया। उत्पल की माता पिता भाई भी आ गए। सवाल है आखिर पत्रकार की गलती क्या है? क्या जनता की परेशानी की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए उससे सवाल पूछना गुनाह है? संवैधानिक अधिकार है सवाल पूछना। आम जनता भी पूछ सकती है सवाल। आखिर शासन प्रशासन को किसने अधिकार दिया कि सवाल करने वालों को सलाखों के पीछे डाल दिया जाए? उस पर सरकारी काम में खलल डालने के आरोप लगाए और जेल में ठूंस दिया जाए? उन तमाम लोगों को चाहिए कि जब पत्रकार को कोर्ट में पेश किया जाए एक सामूहिक याचिका डाल दें और पार्टी बन जाएं फिर कोर्ट में ही पुलिस के खिलाफ बयान दे और उक्त महिला तहसीलदार के कारण हुई परेशानी की पूरी बात बताई जाए ताकि जज पत्रकार को न्याय दिला सके। कोर्ट भी स्वत: विडियो देखकर गवाहों को सम्मन करे ताकि पत्रकार को न्याय मिल सके।विरोध शासन प्रशासन का नहीं करना है केवल जज के सम्मुख गवाही मुकम्मल देनी होगी। इसके बाद जज गवाहों की गवाही और विडियो के साक्ष्य के अनुसार इंसाफ कर सके। इस तरह किसी भी पत्रकार के ऊपर झूठे आरोप लगाने वाले पर न्याय मिलने के बाद एक करोड़ की मान हानि का दावा किया जा सकेगा। तभी बिगड़ैल अधिकारियों को उनके जनता के प्रति कर्तव्य याद आएंगे। इस तरह किसी भी पत्रकार के ऊपर झूठे आरोप लगाने वाले पर न्याय मिलने के बाद एक करोड़ की मान हानि का दावा किया जा सकेगा। तभी बिगड़ैल अधिकारियों को उनके जनता के प्रति कर्तव्य याद आएंगे।

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