HomeIndiaसंपादकीय: गूगल की गुलामी कब छोड़ेगा भारत?

संपादकीय: गूगल की गुलामी कब छोड़ेगा भारत?

चीन गूगल सर्च इंजन का उपयोग नहीं करता। गूगल मैप के स्थान पर Baidu Maps का उपयोग करता है। गूगल प्ले स्टोर के स्थान पर Huawei App Gallery अपने स्मार्ट फोन में डाउनलोड करने का माध्यम अपनाता है। एंड्रॉयड फोन के लिए Tencent App Store यूजर के लिए बेहद पॉपुलर है। चीन में इंस्टाग्राम और फेसबुक का भी उपयोग नहीं करता। उसके बदले में खुद का Xiaohongshu (Red) लाइफ स्टाइल और सोशल मीडिया के उपयोग में लेता है। Weibo का उपयोग माइक्रोब्लॉगिंग और समाचार के लिए ट्विटर, फेसबुक जैसे ऐप की तरह करता है। चीन गूगल की कोई भी सेवा का उपयोग नहीं करता, जैसे सर्च, मैप, जीमेल, यूट्यूब। उसके बदले में चीन Baidu और Sogou का उपयोग करता है। व्हाट्सऐप और मैसेंजर के स्थान पर खुद के बनाए WeChat का उपयोग करता है। WeChat सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं है, बल्कि इसका उपयोग बिल पेमेंट, शॉपिंग और कैब बुक करने जैसे सभी कार्यों के लिए किया जाता है। चीन कभी यूट्यूब उपयोग में नहीं लाता। उसकी जगह Youku का उपयोग किया जाता है। साथ ही चीन निर्मित ऐप Bilibili का भी वीडियो देखने के लिए व्यापक उपयोग होता है। यही कारण है कि चीन की गोपनीयता और डेटा देश के बाहर गद्दारों द्वारा शत्रु को नहीं भेजा जा सकता, जैसा कि भारत में किया जाता है। गूगल, मेटा जैसे प्लेटफॉर्म का भारत में उपयोग करने के कारण ही पाकिस्तान को भारतीय गोपनीयता, डीआरडीओ और सेना की पोजिशन आसानी से पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों तक पहुंचाना सरल हो जाता है, क्योंकि किसी ऐप पर भारत सरकार का पूर्ण कंट्रोल नहीं है। हालांकि सरकार ने कठोर कानून बनाए हैं, जिससे सत्ता के खिलाफ बोलने या लिखने वाले पत्रकारों के वीडियो, इंस्टाग्राम, एक्स आदि पर अपने लिए अहितकर मानने वाले किसी भी कंटेंट को डिलीट करवाने और अकाउंट बैन करने जैसे आदेश देकर किसी का भी अकाउंट सिर्फ भारत में बैन करा सकती है। भारत के बाहर किसी का अकाउंट बैन कराने या कंटेंट डिलीट कराने में सरकार असमर्थ रहती है। धन के लेन-देन के तमाम ऐप हैं, लेकिन सभी को सरकार ने अपने द्वारा विकसित प्रणाली से जोड़ने का काम अवश्य किया है। अमेरिकी गूगल आदि ऐप्स का उपयोग भारत में किए जाने से व्यक्ति की गोपनीयता भंग होने लगी है। भारतीयों का डेटा आसानी से गूगल अपने यहां स्टोर कर विज्ञापन कंपनियों को अवश्य बेचता है, क्योंकि जब आप गूगल सर्च इंजन पर कोई भी जानकारी सर्च करते हैं तो आपके एंड्रॉयड में उसी के विज्ञापन बार-बार आने शुरू हो जाते हैं, जिससे भारतीय लोगों का समय व्यर्थ होता है, लेकिन फायदा गूगल और दूसरे अमेरिकी ऐप उठाते हैं। भारत में आर्थिक लेन-देन के लिए अनेक ऐप जैसे भीम यूपीआई, भारत पे, फोन पे, पेटीएम, गूगल पे और लगभग सभी बैंकों का अपना-अपना पे सिस्टम बना हुआ है, लेकिन फ्रॉड को रोकने की अभी समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। इसीलिए अधिकतर मामले सामने आते रहते हैं। डिजिटल फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से देशवासियों को बचाने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है, लेकिन सरकार इस पर समुचित रोक लगाने में पूरी तरह असमर्थ है। सरकार का ध्यान अपनी गलतियों और असफलताओं को छुपाने में रहता है। सरकार नहीं चाहती कि सोशल मीडिया में उसकी कमियां बाहर आएं और उसकी सत्ता के विरुद्ध कोई आंदोलन खड़ा हो। उदाहरण के लिए, सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई की टिप्पणी को लेकर विदेश में पढ़ने वाले एक छात्र ने मजाकिया तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी का गठन कर दिया। यह इतनी जल्दी वायरल हुआ कि ज्वाइन करने और सपोर्ट करने वाले भारतीयों की बाढ़ ऐसी आ गई कि विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी की सदस्य संख्या कोसों पीछे छूट गई। इस आंदोलन को सरकार ने अपने लिए खतरा मानकर भारत में अकाउंट बैन भले करा दिया हो, लेकिन वैचारिक आंदोलन में बेरोजगार युवाओं, छात्रों, एडवोकेटों, जनहित चाहने वालों और लोकतंत्र बचाने वाले लोगों की बाढ़ सी आ गई है। सिद्धांत है कि बल प्रयोग कर किसी वस्तु को रोकने पर वह दोगुने वेग से लौटने लगती है। कॉकरोच पार्टी की लोकप्रियता भुनाने के लिए हरियाणा के एक एडवोकेट ने नाम और सिंबल ही हाईजैक कर चुनाव आयोग में मान्यता देने के लिए आवेदन कर दिया। सत्ता की भूख में व्यक्ति अंधा होकर अवसर ढूंढता रहता है, ताकि उसकी सोई हुई महत्वाकांक्षा पूरी हो सके। यह उक्त एडवोकेट पर सटीक लागू होती है। कल को उसका संबंध सत्ता से जुड़े होने का प्रमाण मिल जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।

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