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कौशलेंद्र महाराज के मुखारविंद से श्रीकृष्ण जन्म की दिव्य कथा, गांव में भक्तिमय माहौल

गोण्डा, उत्तर प्रदेश। मेजापुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा के चौथे दिन कथाव्यास कौशलेंद्र महाराज ने भक्तों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पावन कथा सुनाई। कथा के दौरान देवकी के आठ संतानों की उत्पत्ति, कंस के अत्याचार और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार का विस्तार से वर्णन किया गया। कथाव्यास ने बताया कि द्वापर युग में मथुरा दो भागों में विभाजित था, जहां एक ओर बिष्टवंश और दूसरी ओर यदुवंश का शासन था। बिष्टवंश में देवक और उग्रसेन दो भाई थे, जिनमें देवक की पुत्री देवकी का विवाह यदुवंश के वासुदेव से हुआ। उग्रसेन का पुत्र कंस अत्याचारी था, जिसने अपने पिता को बंदी बनाकर स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा।कथा के अनुसार, आकाशवाणी के बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया। भाद्रपद मास की अंधेरी रात, अष्टमी तिथि को जेल में दिव्य प्रकाश फैला और भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उस समय चमत्कारिक रूप से जेल के द्वार खुल गए और पहरेदार मूर्छित हो गए।वासुदेव नवजात श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार गोकुल पहुंचे और नंद बाबा के घर बालक को सौंपकर वहां से कन्या को लेकर वापस लौट आए। वहीं गोकुल में भगवान के जन्म की खुशी में उत्सव का माहौल बन गया।कथा में राजा दक्ष की पुत्री शक्ति और भगवान भगवान शिव के विवाह का प्रसंग भी सुनाया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े ध्यान और भाव के साथ सुना।श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और भक्ति में झूमने लगे। इस अवसर पर मुख्य जजमान हरिराम दूबे, पंकज दूबे, लालाजी दूबे, राजू ओझा, वेद प्रकाश ओझा, राम आशीष, संतोष सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे और कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया।

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