
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने धारावी पुनर्विकास परियोजना को नई गति देते हुए इसे सिंगापुर और हांगकांग की आधुनिक आवासीय परियोजनाओं की तर्ज पर विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल इमारतों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि धारावी के नागरिकों के सर्वांगीण विकास, उनकी आजीविका की सुरक्षा और स्थानीय सामाजिक-औद्योगिक संरचना को संरक्षित रखने का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना के केंद्र में धारावी के निवासी हों और इसका क्रियान्वयन निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए। सोमवार को सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि धारावी की पहचान केवल झुग्गी बस्ती के रूप में नहीं, बल्कि लघु उद्योगों, हस्तशिल्प, पुनर्चक्रण, वस्त्र निर्माण, खाद्य उद्योग और सांस्कृतिक विरासत के केंद्र के रूप में भी है। इसलिए पुनर्विकास के दौरान यहां की मौजूदा औद्योगिक और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से कुंभारवाड़ा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने पर जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है और इसकी विशिष्टता को बरकरार रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद किया जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण में वर्ष 2028 तक कम से कम 10 हजार नए आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। पात्र निवासियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त घर दिए जाएंगे, जिनमें स्वतंत्र रसोईघर, शयनकक्ष, शौचालय, प्राकृतिक प्रकाश और महिलाओं के लिए पृथक स्वच्छता सुविधाएं शामिल होंगी। साथ ही पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए नेचर पार्क विकसित करने, वृक्षों के पुनरोपण तथा बड़े पैमाने पर हरित क्षेत्र बढ़ाने की भी योजना बनाई गई है। बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, धारावी के चमड़ा उद्योग, वस्त्र निर्माण, मिट्टी के बर्तन, पुनर्चक्रण और खाद्य प्रसंस्करण जैसे पारंपरिक व्यवसायों को संरक्षित करने के लिए विशेष एमएसएमई योजना तैयार की जा रही है। खाद्य उद्योगों के लिए आधुनिक क्लाउड किचन विकसित करने की भी योजना है, जिससे स्थानीय उद्यमों को नई आर्थिक संभावनाएं मिल सकें। परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता देश का पहला अत्याधुनिक मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब होगा, जो पश्चिम, मध्य और हार्बर रेलवे नेटवर्क को विभिन्न मेट्रो लाइनों से जोड़ेगा। भविष्य में इसे बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने की भी योजना है। इस केंद्र पर यात्रियों के लिए सिटी चेक-इन सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे वे एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही अपना सामान चेक-इन कर सकेंगे। इसके अलावा एयरपोर्ट तक जल परिवहन के लिए फास्ट जेट्टी और भविष्य की एयर टैक्सी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए वर्टीपोर्ट भी विकसित किया जाएगा। इस प्रकार रेलवे, मेट्रो, सड़क, जलमार्ग और हवाई परिवहन की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। परियोजना के अंतर्गत बीकेसी से धारावी तक के क्षेत्र का व्यापक सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। हरित पट्टियां, आधुनिक फुटपाथ, आकर्षक वास्तुशिल्प तथा आधुनिक आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जिससे यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान प्राप्त कर सके। सरकार ने पुनर्वास भवनों के निर्माण के लिए 42 माह और माटुंगा क्षेत्र के पुनर्वास कार्यों के लिए 39 माह की समय-सीमा निर्धारित की है। परियोजना का पहला चरण मार्च 2028 तक पूरा कर नागरिकों को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों और त्वरित अनुमतियों के लिए विशेष प्रकोष्ठ की स्थापना से यह महत्वाकांक्षी परियोजना समय पर पूरी होगी और मुंबई को विश्वस्तरीय शहरी विकास का नया मॉडल मिलेगा।



