मध्य प्रदेश में 23,300 करोड़ रुपये से अधिक के विकास प्रस्तावों को मंजूरी

भोपाल, मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में वन संरक्षण, सिंचाई, शहरी विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े 23,300 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें वन विभाग की नौ योजनाओं के लिए 17,240 करोड़ रुपये, सिंचाई परियोजनाओं के लिए 4,103 करोड़ रुपये और शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए 700 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
वन और वन्यजीव संरक्षण पर 17,240 करोड़ खर्च होंगे
कैबिनेट ने वन विभाग की नौ योजनाओं को वर्ष 2026 से 2031 तक जारी रखने के लिए 17,240 करोड़ 55 लाख रुपये मंजूर किए। इसमें वन विभाग के संचालन और मैदानी कार्यालयों के लिए 10,664 करोड़ 79 लाख रुपये, क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 1,994 करोड़ 30 लाख और राष्ट्रीय उद्यानों के लिए 1,623 करोड़ 79 लाख रुपये रखे गए हैं। इसके अलावा लकड़ी उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों के लिए 1,107 करोड़ 6 लाख और चिड़ियाघर एवं रेस्क्यू सेंटर के लिए 604 करोड़ 23 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। उज्जैन और जबलपुर में नए रेस्क्यू सेंटर भी बनाए जाएंगे। इन योजनाओं के तहत जंगलों की सुरक्षा, बाघों की निगरानी, वनकर्मियों के प्रशिक्षण और वन्यजीवों के बचाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
चार सिंचाई परियोजनाओं को मिलेगी गति
किसानों को सिंचाई सुविधा और कुछ क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चार परियोजनाओं पर 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें पन्ना की मझगांव परियोजना के लिए 69 करोड़ 36 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 13,060 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। विदिशा की टेम मध्यम परियोजना पर 277 करोड़ 52 लाख रुपये खर्च होंगे और इससे 12,814 हेक्टेयर कृषि भूमि को लाभ मिलेगा। मऊगंज, सीधी और सिंगरौली की सीतापुर-हनुमना माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 3,620 करोड़ 82 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। सोन नदी पर बैराज बनाकर 1.20 लाख हेक्टेयर भूमि तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की योजना है। वहीं, उज्जैन की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के लिए 136 करोड़ 3 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसका उद्देश्य शिप्रा नदी में सालभर पानी बनाए रखना है।
शहरी सुविधाओं के लिए 700 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को दो साल और जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 700 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। योजना के तहत 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक शहरों में सड़क, पेयजल, नाली, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और सामुदायिक भवनों से जुड़े काम कराए जाएंगे। इसके अलावा श्मशान घाट, रैन बसेरे, खेल मैदान और आपदा प्रबंधन से संबंधित सुविधाओं पर भी राशि खर्च की जाएगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन
प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये की उद्योग निवेश संवर्धन सहायता योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी। इसके तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को पूंजीगत सुविधाएं विकसित करने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में निवेश बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
