Wednesday, March 11, 2026
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सरपंच संतोष देशमुख हत्या मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, ग्रामीणों ने भूख हड़ताल शुरू की

बीड। महाराष्ट्र के बीड जिले के मासजोग गांव के निवासियों ने मंगलवार, 25 फरवरी को सरपंच संतोष देशमुख की हत्या की जांच को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी। ग्रामीणों ने स्थानीय केज पुलिस द्वारा शुरुआती जांच में हुई कथित चूक की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके अलावा, वे मुख्य आरोपी कृष्ण अंधाले की गिरफ्तारी की भी मांग कर रहे हैं। मारे गए सरपंच के भाई धनंजय देशमुख ने कहा कि जब तक प्रशासन का प्रतिनिधिमंडल उनसे नहीं मिलता और ठोस कार्रवाई का आश्वासन नहीं देता, तब तक उनका ‘अन्नत्याग आंदोलन’ जारी रहेगा। धनंजय देशमुख अपने परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों के साथ इस आंदोलन में शामिल हैं।
पुलिस की भूमिका पर सवाल, एसपी से ग्रामीणों की मुलाकात
ग्रामीणों के एक समूह ने सोमवार को बीड जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नवनीत कंवत से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद धनंजय देशमुख ने कहा, “एसपी के साथ चर्चा सकारात्मक रही, लेकिन केज पुलिस ने जांच से संबंधित कई महत्वपूर्ण विवरण एसपी के साथ साझा नहीं किए। हम दोबारा जांच की मांग को लेकर औपचारिक आवेदन दायर करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केज पुलिस ने जांच के शुरुआती चरण में जानबूझकर गलतियां कीं, जो कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
तेजी से कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि मुख्य आरोपी कृष्ण अंधाले को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।
मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया जाए। फास्ट-ट्रैक कोर्ट में केस की सुनवाई हो, ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिल सके। ग्रामीणों ने इससे पहले भी विरोध प्रदर्शन के रूप में ‘जल समाधि आंदोलन’ किया था, जिसमें वे अपनी मांगों को लेकर घंटों पानी में खड़े रहे थे।
क्या है पूरा मामला?
9 दिसंबर, 2024 को सरपंच संतोष देशमुख का अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि तीन दिन पहले एक पवन ऊर्जा फर्म से पैसे वसूलने के प्रयास का उन्होंने विरोध किया था, जिसके चलते उनकी हत्या कर दी गई। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और एनसीपी नेता धनंजय मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड को इस मामले में जबरन वसूली के आरोप में हत्या के कुछ हफ्तों बाद गिरफ्तार किया गया था। यह भी आरोप लगाया गया कि केज पुलिस ने 6 से 9 दिसंबर के बीच त्वरित कार्रवाई नहीं की, जिससे अपराधियों को भागने का मौका मिला। इस लापरवाही के चलते—
केज पुलिस स्टेशन के एक सब-इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया।
पूर्व जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) को हटा दिया गया। एसपी नवनीत कंवत ने बताया कि प्रदर्शनकारियों से मिलने के लिए प्रशासनिक प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, “ग्रामीणों ने कल (सोमवार) की बैठक में कुछ मुद्दे उठाए थे, लेकिन उन्होंने अपनी मांगों को लिखित में नहीं दिया था। हमने उनसे लिखित में अपनी मांगें देने को कहा है। उनकी शिकायतें मिलने के बाद, हम जांच की समीक्षा करेंगे। ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के कारण प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और पुलिस विभाग पर निष्पक्ष जांच करने की मांग तेज हो गई है। अब यह देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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