
मुंबई। महाराष्ट्र को देश का प्रमुख ‘ग्रीन स्टील हब’ बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से गडचिरोली जिले की छह लौह अयस्क (आयरन ओर) खदानें महाराष्ट्र राज्य खनिज महामंडल को सौंपने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि ये खदानें राज्य सरकार को मिलती हैं, तो उन्हें अगले दो वर्षों में विकसित कर वर्ष 2030 तक उत्पादन शुरू किया जा सकता है, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर स्टील निर्यातक राष्ट्र बनाने में मदद मिलेगी। गुरुवार को मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में ‘वर्षा’ सरकारी निवास पर आयोजित बैठक में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय राज्य मंत्री सतीशचंद्र दुबे, राज्य के खान राज्यमंत्री पंकज भोयर तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में राज्य के खनन, ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गडचिरोली का लौह अयस्क देश के सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले खनिजों में शामिल है। इस कारण गडचिरोली भविष्य में देश के प्रमुख औद्योगिक और इस्पात उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के निवेश और लाखों रोजगार अवसरों की संभावना है। यहां लौह अयस्क के विशाल भंडार के साथ-साथ चूना पत्थर सहित इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक अन्य खनिज भी उपलब्ध हैं। निकटवर्ती कोयला खदानें, पर्याप्त जल संसाधन और विकसित होती आधारभूत संरचना इस क्षेत्र को स्टील उद्योग के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती हैं। फडणवीस ने कहा कि गडचिरोली में नक्सलवाद का प्रभाव काफी कम होने के कारण विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। राज्य सरकार ने टाटा, जेएसडब्ल्यू और अन्य बड़ी कंपनियों के साथ स्टील उद्योग स्थापित करने के लिए समझौते किए हैं। उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। इसके साथ ही गडचिरोली को जेएनपीटी और प्रस्तावित वधावन बंदरगाह से जोड़ने के लिए रेल और माल परिवहन नेटवर्क विकसित करने की योजना बनाई गई है। समृद्धि महामार्ग के किनारे भविष्य की रेल परियोजनाओं के लिए भूमि भी आरक्षित की गई है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र में 40 से अधिक खनिज ब्लॉक नीलामी के लिए तैयार हैं और 34 में से 14 ब्लॉकों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यदि महाराष्ट्र राज्य खनिज महामंडल को छह लौह अयस्क खदानें आवंटित की जाती हैं, तो उन्हें तीन से चार वर्षों में चालू किया जा सकता है। इसके लिए राज्य सरकार ने विशेष प्रशासनिक तंत्र तैयार किया है तथा जिला स्तर पर खनन प्राधिकरण भी स्थापित किए गए हैं। इन खदानों से वर्ष 2030 तक 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में विकसित की जा रही एकीकृत इस्पात पारिस्थितिकी (इंटीग्रेटेड स्टील इकोसिस्टम) के कारण चीन की तुलना में भी कम लागत पर स्टील उत्पादन संभव हो सकेगा। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्टील कंपनियों ने गडचिरोली में निवेश में रुचि दिखाई है तथा हजारों एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि देश में अब तक लगभग 500 खदानों की नीलामी हुई है, लेकिन केवल 50 खदानें ही उत्पादन कर रही हैं। ऊंचे प्रीमियम के कारण कई खदानें आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रह जातीं। ऐसे में राज्य महामंडल के माध्यम से खनन गतिविधियां अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ संचालित की जा सकती हैं। फडणवीस ने कहा कि यदि इन खदानों का संचालन महाराष्ट्र राज्य खनिज महामंडल को सौंपा जाता है, तो राज्य सरकार स्टील उद्योगों को पारदर्शी तरीके से खनिज उपलब्ध करा सकेगी और खदानों को दो वर्षों के भीतर उत्पादन के लिए तैयार किया जा सकेगा। उन्होंने ओडिशा में राज्य महामंडल को आवंटित बॉक्साइट खदानों का उदाहरण देते हुए महाराष्ट्र के लिए लगभग 1,300 हेक्टेयर क्षेत्र मंजूर करने का आग्रह किया। बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्य की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने बिजली उत्पादन कंपनियों को कोयले की गुणवत्ता को लेकर होने वाले विवादों और आर्थिक नुकसान को रोकने के लिए स्वचालित नमूना परीक्षण प्रणाली (ऑटोमेटेड सैंपलिंग सिस्टम) लागू करने के निर्देश भी दिए। बैठक में राज्य में खनन, कोयला उत्पादन और ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न चुनौतियों और मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि केंद्र सरकार, कोल इंडिया और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से जुड़ी कई लंबित मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे, जिससे महाराष्ट्र के औद्योगिक और ऊर्जा विकास को नई गति मिलेगी।



