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डहाणू और जव्हार डिपो को एक महीने में मिलेंगी 30 नई बसें, एसटी बेड़े में शामिल होंगी कुल 8,300 नई बसें

मुंबई। पालघर जिले के डहाणू और जव्हार डिपो को एक महीने के भीतर 30 नई बसें उपलब्ध कराई जाएंगी। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार और बसें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। यह जानकारी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने विधान परिषद में दी। बुधवार को विधान परिषद में सदस्य निरंजन डावखरे ने डहाणू और जव्हार डिपो के लिए अच्छी स्थिति वाली बसें उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया था, जबकि सदस्य प्रवीण दरेकर ने राज्य में एसटी बस दुर्घटनाओं में वृद्धि को लेकर सवाल किया। चर्चा में प्रवीण दरेकर, बच्चू कडू और अनिकेत तटकरे ने भाग लिया। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि दुर्गम, आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों तक एसटी सेवा पहुंचाना राज्य सरकार की नीति है। इन क्षेत्रों में निर्बाध परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के लिए बस बेड़े का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले सात-आठ वर्षों में नई बसों की खरीद कम हुई थी। इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध होने में देरी के कारण सरकार ने दोबारा डीजल बसें खरीदने का निर्णय लिया। अब तक 2,640 डीजल बसें खरीदी गई हैं और चरणबद्ध तरीके से कुल 8,300 नई बसें एसटी के बेड़े में शामिल की जा रही हैं। मंत्री सरनाईक ने कहा कि बसों के इस्तेमाल की अधिकतम अवधि 15 वर्ष होने के कारण पुरानी बसों में विशेष रूप से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में खराबी की घटनाएं बढ़ी थीं। हालांकि, तकनीकी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उनसे अधिक प्रभावी ढंग से काम कराने पर जोर दिया जाएगा। राज्य में एसटी बस दुर्घटनाओं के संबंध में मंत्री सरनाईक ने बताया कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नए चालकों को 48 से 80 दिनों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा सुरक्षित वाहन चलाने का विशेष प्रशिक्षण, सिम्युलेटर के माध्यम से प्रशिक्षण, नियमित दृष्टि जांच, अल्कोहल जांच और सेवाकाल के अनुसार पुनश्चर्या प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में बसों की आयु सीमा 15 वर्ष से घटाकर 8 वर्ष करने और चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों की ओर बढ़ने की नीति राज्य सरकार ने अपनाई है।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए दो महीने में आएंगी 200 मिनी बसें
परिवहन मंत्री ने बताया कि पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में बड़ी बसें नहीं पहुंच पाने के कारण राज्य के लिए 200 मिनी बसें उपलब्ध कराई जा रही हैं। ये बसें अगले दो महीनों में सेवा में शामिल हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन बसों का संचालन व्यावसायिक लाभ कमाने के बजाय दुर्गम क्षेत्रों के किसानों, आदिवासियों, दिव्यांगों और आम नागरिकों को परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाएगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि एसटी के नवनिर्मित बस पोर्ट में दिव्यांगों के लिए कुछ स्थान आरक्षित रखने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा।

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