
मुख्यमंत्री फडणवीस ने नियोजित और सर्वसमावेशी विकास पर दिया जोर
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास के समन्वय की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर के जन्मस्थान चोंडी के सर्वांगीण विकास का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करते हुए पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चोंडी के विकास को सुनियोजित और समावेशी तरीके से करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना नई पीढ़ी को अहिल्यादेवी के जीवन से प्रेरणा देगी और क्षेत्र को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगी।
681 करोड़ रुपये का भव्य विकास आराखड़ा
चोंडी स्थित स्मृतिस्थल के विकास के लिए 681 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत भव्य प्रतिमा, आकर्षक उद्यान, नदी तट का विकास, आधुनिक संग्रहालय, ओपन एयर थिएटर और पर्यटन सुविधा केंद्र बनाए जाएंगे।
जल प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन पर फोकस
परियोजना में जल प्रबंधन को विशेष प्राथमिकता दी गई है, ताकि स्मारक परिसर में सालभर पानी उपलब्ध रहे। साथ ही हरित क्षेत्र और खुले स्थानों का संतुलन बनाए रखते हुए सौंदर्यीकरण किया जाएगा। बुडीत बंधारों के स्थान पर ‘बॅरेज’ निर्माण की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
PPP मॉडल से गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित
कुछ सुविधाओं के निर्माण और रखरखाव के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) अपनाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे परियोजना की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित हो सके।
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को मिली गति
सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 360 करोड़ रुपये के सड़क प्रकल्पों में से दो कार्यों के लिए कार्यारंभ आदेश जारी किए जा चुके हैं। विभिन्न विभागों के समन्वय से भूमि सीमांकन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
पर्यटन और रोजगार के नए अवसर
विधानपरिषद के सभापति प्रा. राम शिंदे के अनुसार, इस योजना के माध्यम से इतिहास, संस्कृति और पर्यटन का समन्वय होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और चोंडी को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।




