Tuesday, April 28, 2026
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संविधान संशोधन विधेयकों पर संयुक्त संसदीय समिति की व्यापक चर्चा शुरू

मुंबई। देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक सुधारों को लेकर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया तेज कर दी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाने तथा राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से इन विधेयकों पर विभिन्न राज्यों और संस्थाओं से सुझाव लिए जा रहे हैं। सोमवार को संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षा अपराजिता सारंगी ने मुंबई के ताज होटल में आयोजित पत्रकार परिषद में जानकारी दी कि संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 और केंद्रशासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक 2025 पर गहन चर्चा और व्यापक परामर्श प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि इन विधेयकों को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 20 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और 12 नवंबर 2025 को इन्हें विस्तृत जांच और रिपोर्ट के लिए संयुक्त संसदीय समिति को सौंपा गया। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10, कुल 31 सांसद शामिल हैं। समिति 27 और 28 अप्रैल को महाराष्ट्र के दौरे पर है, जहां विभिन्न हितधारकों से संवाद किया जा रहा है। अब तक समिति नौ बैठकों के माध्यम से गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, कानून आयोग, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों तथा राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के प्रतिनिधियों के विचार सुन चुकी है। अपराजिता सारंगी ने बताया कि संवैधानिक नैतिकता को बनाए रखने और राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के उद्देश्य से समिति ने दिल्ली के बाहर भी बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य के गृह व विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, न्यायिक संस्थाओं और विधि विशेषज्ञों से भी विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संविधान संशोधन के तहत अनुच्छेद 75, 164 और 239(एए) में बदलाव का सुझाव है, जिसके अनुसार गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिनों से अधिक हिरासत में रहने वाले उच्च पदस्थ जनप्रतिनिधियों को उस अवधि में अपने कार्यकारी अधिकारों का उपयोग करने से रोका जा सकता है। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस व्यापक परामर्श प्रक्रिया से प्राप्त सुझावों के आधार पर एक संतुलित और प्रभावी रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे लोकसभा अध्यक्ष के माध्यम से संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, 29 अप्रैल 2026 को भुवनेश्वर में ओडिशा सरकार और अन्य संस्थाओं के साथ भी चर्चा की जाएगी।

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