जयप्रकाश और संपूर्ण क्रांति: लोकतंत्र के मूल्यों की पुनर्स्थापना का आह्वान
रविशंकर कुमार चौधरीभारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 5 जून, 1974 एक ऐसा दिन है जो व्यापक सामाजिक और वैचारिक जागरण
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Read Moreलोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल चुनाव कराने या सरकार बनाने में नहीं, बल्कि नागरिकों को सत्ता और संवैधानिक संस्थाओं से
Read Moreजब इंसान इस दुनिया से चला जाता है,तब सब कुछ शांत हो जाता है… न कोई सवाल बचता है,न कोई
Read Moreडॉ. सुधाकर आशावादीएक समय था जब देश में कांग्रेस की सरकार थी। तब लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने पटना के गांधी
Read Moreडॉ.राघवेंद्र शर्मामेरे लिए हिंदू और हिंदुस्तान वह शब्द है, जिसे करोड़ों भारतीय अपनी पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक चेतना से जोड़कर
Read Moreडॉ. शैलेश शुक्लाकृत्रिम मेधा यानी एआई आज दुनिया की सबसे तेज तकनीकी दौड़ बन गई है। चैटबॉट से लेकर अस्पतालों
Read Moreअंजनी सक्सेनानाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के उन गिने-चुने अभिनेताओं में से एक थे, जिन्होंने अभिनय को पेशा नहीं, आत्मा का
Read Moreविवेक रंजन श्रीवास्तवअनिल कुमार अस्थाना का उपन्यास “अनिकेत : शून्यता की ओर एक पदयात्रा” पहली दृष्टि में एक सत्तर वर्षीय
Read Moreसुधाकर आशावादी सारा खेल भरोसे का है। किसी का भरोसा जीतना आसान नहीं है। कचौड़ियों ने भरोसा जीत रखा है।
Read Moreसौरभ वार्ष्णेयभारत में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र में नागरिक के सबसे महत्वपूर्ण अधिकार मताधिकार
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