पंचकूला स्कूल में छह साल की बच्ची पर हमले का मामला, दो शिक्षिकाएं निलंबित, स्कूल प्रबंधन पर एफआईआर

पंचकूला, हरियाणा। सरकारी स्कूल में छह साल की विशेष जरूरतों वाली बच्ची पर आठ वर्षीय छात्र के हमले के मामले में हरियाणा सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बच्ची के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शनिवार को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। स्कूल पर बच्चों की सुरक्षा और देखभाल में लापरवाही बरतने का आरोप है। वहीं, बच्चे को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश करने के बाद अंबाला स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया गया। घटना के विरोध में परिजनों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन भी किया। शिक्षा विभाग ने बच्ची की कक्षा प्रभारी सिमरनजीत और आरोपी छात्र की कक्षा प्रभारी पूजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिक्षा निदेशक जितेंद्र दहिया को पत्र भेजा गया है। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के निर्देश पर जांच के लिए दो कमेटियां गठित की गई हैं। शिक्षा विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी को 24 घंटे और जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट सौंपनी है। जांच में स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की पड़ताल की जाएगी। हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 28 अक्टूबर की घटना की परिस्थितियों, स्कूल की निगरानी व्यवस्था, सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रोस्टर का ब्योरा मांगा है। आयोग की अध्यक्ष त्रिप्ति हरिपाल श्योराण ने शनिवार को पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचकर बच्ची के परिजनों से मुलाकात की। बच्ची के चेहरे और नाक में फ्रैक्चर सहित गंभीर चोटें आई हैं, हालांकि उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। सरकार ने पीजीआई में उसके इलाज का पूरा खर्च उठाने और परिवार की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने की बात कही है। घटना का करीब सवा तीन मिनट का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आठ वर्षीय छात्र बच्ची पर बार-बार हमला करता दिखाई दे रहा है। फुटेज के अनुसार, वह बच्ची का सिर बेंच पर पटकने के बाद लात-घूंसों से मारता है और बाल पकड़कर घसीटता है। इसके बाद ईंट और डस्टबीन से भी हमला करता है। बच्ची के अचेत हो जाने के बाद भी हमला जारी रहता है। घटना का पता तब चला, जब बच्ची को लेने पहुंचे ऑटो चालक को वह स्कूल में नहीं मिली। पिता ने तलाश की तो बच्ची पहली मंजिल के एक कमरे में गंभीर रूप से घायल और खून से लथपथ हालत में मिली। परिजनों का आरोप है कि स्कूल बंद करते समय चौकीदार ने कमरे की जांच नहीं की और बाहर से ताला लगाकर चला गया। बच्ची को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां करीब 36 घंटे बाद उसे होश आया। शिक्षा विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि घटना के समय बाल वाटिका की दो कक्षाओं के करीब 80 बच्चे एक साथ पढ़ रहे थे। उधर, पुलिस आरोपी छात्र के व्यवहार, दिनचर्या और पारिवारिक माहौल की भी जांच कर रही है। बताया गया है कि बच्चा मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलता था, लेकिन करीब डेढ़ महीने पहले परिजनों ने उसे मोबाइल देना बंद कर दिया था। पुलिस उसकी मानसिक स्थिति और व्यवहार का आकलन करने के लिए मनोचिकित्सक की राय ले रही है। पड़ोसियों के मुताबिक, बच्चा सामान्य स्वभाव का था और गली में दूसरे बच्चों के साथ खेलता था। उन्होंने पहले उसमें आक्रामक व्यवहार नहीं देखा। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि घटना से पहले उसके व्यवहार में कोई बदलाव आया था या नहीं। हालांकि, फिलहाल मोबाइल गेम खेलने और स्कूल में हुई इस घटना के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
