झांसी में पराली जलाई तो लगेगा ₹15 हजार तक जुर्माना, किसानों को जागरूक करेगा ‘किसान रथ’
डीएम गौरांग राठी ने किसान दिवस में दिए निर्देश; न्याय पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर फसल बीमा की जानकारी दें कंपनियां

झांसी, उत्तर प्रदेश। खेतों में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए झांसी जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए ‘किसान रथ’ रवाना करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुसार फसल अवशेष जलाना दंडनीय है और ऐसा करने वालों से भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली की जाएगी। विकास भवन सभागार में आयोजित किसान दिवस की अध्यक्षता जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। उन्होंने सबसे पहले अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के सर्वे की जानकारी ली और अधिकारियों को किसानों की शिकायतों एवं समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ तत्काल निस्तारण करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि किसान दिवस में आने वाली शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। संबंधित अधिकारियों की बैठक में मौजूदगी अनिवार्य होगी और अनुपस्थित रहने अथवा समस्याओं के समाधान में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की जाएगी।
बीमा कंपनी लगाए कैंप, किसानों को बताए कितना कटेगा प्रीमियम
किसान दिवस में किसानों ने मूंगफली और उड़द की फसल को हुए नुकसान तथा फसल बीमा से संबंधित समस्याएं उठाईं। इस पर जिलाधिकारी ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को न्याय पंचायत स्तर पर कैंप आयोजित करने और बीमित किसानों को उनकी पॉलिसी एवं क्लेम प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान की फसल और हिस्से के अनुसार ही बीमा प्रीमियम काटा जाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि नुकसान होने पर बीमा क्लेम प्राप्त करने में परेशानी न हो। किसानों से बीमा क्लेम से जुड़ी जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों को भी देने को कहा गया, जिससे भुगतान नहीं मिलने की स्थिति में उसकी समीक्षा की जा सके।
पराली जलाने पर ₹2,500 से ₹15 हजार तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति
जिलाधिकारी ने बताया कि निर्धारित प्रावधानों के तहत 2 एकड़ से कम क्षेत्र में फसल अवशेष जलाने पर ₹2,500, 2 से 5 एकड़ तक ₹5,000 और 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ₹15,000 तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने का प्रावधान है। उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित प्रावधानों के तहत अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। धान बाहुल्य क्षेत्रों में पराली जलाने की घटना न हो, इसके लिए ग्राम पंचायतों को भी निगरानी और जागरूकता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
पराली को जलाएं नहीं, खाद बनाकर बढ़ाएं पैदावार
‘प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू’ योजना के तहत डीएम ने किसानों से खेतों में कृषि अवशेष और घरेलू कचरा नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने बताया कि पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को निःशुल्क वेस्ट डी-कंपोजर कैप्सूल उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनकी मदद से फसल अवशेष को खाद में बदला जा सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से विकासखंड मोंठ, बड़ागांव और चिरगांव में किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया। डीएम ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ खेतों के लाभकारी कीट नष्ट होते हैं और मिट्टी के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचता है, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ सकता है। किसान दिवस में मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और किसान मौजूद रहे।
