
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा छह वरिष्ठ राजनीतिक पदाधिकारियों के लिए नई सरकारी गाड़ियां उपलब्ध कराने के लगभग 1.5 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कड़ी नाराजगी के बाद अब इस प्रस्ताव को वापस लिए जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनता का पैसा केवल विकास कार्यों और जनहित पर खर्च होना चाहिए, गैर-जरूरी खर्च किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने बीएमसी को फटकार लगाते हुए कहा कि वित्तीय संसाधनों का उपयोग लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं और विकास कार्यों पर किया जाना चाहिए। उन्होंने नगर निकाय को फिजूलखर्ची से बचने और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बाद बढ़ते राजनीतिक और सार्वजनिक विरोध को देखते हुए बीएमसी अब प्रस्ताव वापस लेने पर विचार कर रही है। विवाद की शुरुआत 30 जुलाई को स्थायी समिति की बैठक में उस प्रस्ताव से हुई, जिसमें डिप्टी मेयर, सदन के नेता, विपक्ष के नेता तथा तीन प्रमुख समिति अध्यक्षों के लिए छह नई टोयोटा इनोवा क्रिस्टा गाड़ियां उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया था। कांग्रेस के समूह नेता अशरफ आजमी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जब नगर निगम वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है, तब मौजूदा महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन वाहनों को बदलने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने इसे अनावश्यक खर्च बताते हुए बीएमसी से वित्तीय अनुशासन अपनाने की मांग की। मामले ने जल्द ही राजनीतिक रूप ले लिया। भाजपा के समूह नेता गणेश खनकर ने दावा किया कि प्रस्ताव पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच चर्चा हुई थी और सहमति के बाद ही इसे आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले सभी दलों के नेताओं के हस्ताक्षर सुनिश्चित किए जाएंगे, ताकि बाद में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने भी प्रस्ताव का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष को इस निर्णय की पूरी जानकारी थी और चर्चा के दौरान किसी ने आपत्ति नहीं जताई थी। भाजपा की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि बीएमसी इन वाहनों को सीधे खरीदने के बजाय ‘वेट लीज’ (Wet Lease) व्यवस्था के तहत किराये पर लेने की योजना बना रही थी, जिसमें वाहन प्रदाता रखरखाव की जिम्मेदारी निभाता, जबकि बीएमसी केवल ईंधन और चालक का खर्च वहन करती। साथ ही यह सुझाव भी दिया गया कि मेयर और नगर आयुक्त को छोड़कर सभी वरिष्ठ निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के लिए समान श्रेणी की वाहन नीति लागू की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री की सख्त टिप्पणी के बाद अब इस प्रस्ताव के भविष्य पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।

