महाराष्ट्र के शहरों को कचरामुक्त बनाने के लिए बनेंगे बायोगैस प्रकल्प, मुख्यमंत्री फडणवीस ने दिए टास्क फोर्स गठन के निर्देश
मुंबई महानगर क्षेत्र, वसई-विरार, मीरा-भाईंदर, कल्याण-डोंबिवली सहित पुणे के हिंजवडी और चाकण में कचरे से सीबीजी उत्पादन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र के शहरों को कचरामुक्त बनाने और कचरे से कॉम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संबंधित प्रकल्पों की स्थापना हेतु टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर यह संभव है, वहां राज्य की सीबीजी नीति के अनुसार प्रकल्प स्थापित किए जाएं। मंगलवार को मुख्यमंत्री फडणवीस ने वर्षा निवास पर कचरामुक्त शहरों और कॉम्प्रेस्ड बायोगैस प्रकल्पों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में प्रस्तावित परियोजनाओं की जानकारी ली। बैठक में राज्यमंत्री माधुरी मिसाल, मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे और नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव के. एच. गोविंदराज सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान केवा ग्रीन की कार्यकारी निदेशक वृंदा ठाकुर, प्रबंध निदेशक केदार वझे और निदेशक नंदन वझे ने नागपुर में कचरे से बायोगैस उत्पादन के लिए संचालित प्रकल्प का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने राज्य के अन्य शहरों में इसी प्रकार की परियोजनाएं स्थापित करने की संभावनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सीबीजी प्रकल्पों की योजना बनाते समय कचरे की मात्रा, उपलब्ध भूमि, तकनीक की उपयोगिता और गैस पाइपलाइन की दूरी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने इस क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों, तेल कंपनियों और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की भागीदारी से परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से महानगरपालिकाओं के कचरा उठाने और उसके प्रबंधन पर होने वाले खर्च में बचत हो सकेगी। साथ ही शहरों को कचरामुक्त बनाने के उद्देश्य को भी गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से मुंबई महानगर क्षेत्र में कचरे की बढ़ती समस्या का उल्लेख करते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका, वसई-विरार, मीरा-भाईंदर और कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका क्षेत्रों में सीबीजी प्रकल्प स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा। इसके अलावा पुणे के हिंजवडी और चाकण क्षेत्रों में भी ऐसी परियोजनाओं की व्यवहार्यता जांचने के निर्देश दिए। बैठक में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग और प्रकल्पों के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। नागपुर के प्रकल्प के अनुभव, क्लस्टर पद्धति से परियोजनाओं की स्थापना, कचरे के पृथक्करण, गैस पाइपलाइन से जोड़ने और विभिन्न तकनीकों के उपयोग पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि महानगरपालिका क्षेत्रों के कचरे के निस्तारण के लिए आसपास के शहरों को शामिल करते हुए क्लस्टर मॉडल विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। इसके अंतर्गत शहरों में कचरे का प्राथमिक वर्गीकरण कर आगे की प्रक्रिया शहर के बाहर उपयुक्त स्थानों पर की जा सकती है। इससे शहरी क्षेत्रों में भूमि पर पड़ने वाला दबाव कम होगा। बैठक में यह भी बताया गया कि गैस पाइपलाइन के नजदीक सीबीजी प्रकल्प स्थापित करने से उत्पादित गैस के परिवहन पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। इस दृष्टि से परियोजनाओं के स्थान का चयन करते समय गैस पाइपलाइन की उपलब्धता को भी महत्व देने की आवश्यकता है। इस अवसर पर स्वच्छ महाराष्ट्र मिशन के निदेशक नवनाथ वाठ, केवा ग्रीन की कार्यकारी निदेशक वृंदा ठाकुर, प्रबंध निदेशक केदार वझे, निदेशक नंदन वझे, बीपीसीएल के मुख्य महाप्रबंधक इंद्रजीत सिंह, महाप्रबंधक संतोष वर्षने और डब्ल्यूटीटी के टीजर्ड व्हॅन बर्ग उपस्थित रहे। राज्य की विभिन्न महानगरपालिकाओं के आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
