6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य के लिए मिशन मोड पर काम करने का आह्वान

मुंबई। ग्रामीण क्षेत्रों के महिला स्वयं सहायता समूहों को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सक्षम उद्यमी बनाने के लिए बैंकों को संवेदनशीलता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना चाहिए। केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुंबई में आयोजित ‘स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज’ की राष्ट्रीय समीक्षा बैठक के समापन अवसर पर यह बात कही।केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना के अनुरूप देश में 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ तैयार करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला और तहसील स्तर के प्रशासन को महिलाओं के आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए मिशन मोड में काम करना होगा। देश में 3 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य हासिल करना अपेक्षाकृत आसान था, लेकिन अब 6 करोड़ का लक्ष्य पूरा करने के लिए सालाना 30 से 50 हजार रुपये आय वाली जमीनी स्तर की महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर लखपति बनाना होगा। उन्होंने कहा कि कई बार बैंक पहले से संपन्न क्षेत्रों में आसानी से ऋण वितरित करते हैं, जबकि जहां वास्तविक गरीबी है, वहां बैंकों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है। ग्रामीण महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयां बैंक स्तर पर ही आती हैं। इसलिए बैंक कर्मचारियों का उचित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता जरूरी है। उन्होंने जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठकों में कई निजी बैंकों के प्रतिनिधियों के अनुपस्थित रहने की शिकायतों पर भी नाराजगी जताई।कई बैंकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य से डेढ़ से दो गुना बेहतर प्रदर्शन करने पर केंद्रीय मंत्री ने उनकी सराहना की। उन्होंने बताया कि आगे प्रत्येक तीन महीने में वर्चुअल और प्रत्येक छह महीने में प्रत्यक्ष समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। महिला बचत समूहों की समस्याओं के समाधान और दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की मासिक, तिमाही और छह माह के अंतराल पर समीक्षा की जाएगी।बैठक के दौरान चौहान ने स्वयं सहायता समूहों की महिला प्रतिनिधियों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। पुणे और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों द्वारा ऋण स्वीकृति में आने वाली बाधाओं को गंभीरता से लिया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर बैंकिंग प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की जाएगी तथा ऋण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस नीति बनाई जाएगी।कर्ज मंजूरी में डिजिटल व्यवस्था बाधा न बने, इसके लिए ‘जनसमर्थ पोर्टल’ की तकनीकी खामियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए। लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने की बात भी कही गई। उमेद और डीएवाई-एनआरएलएम से जुड़ी महिलाओं को बैंकिंग प्रक्रिया, सरकारी योजनाओं की जानकारी और शिकायत निवारण के लिए एक ही मंच पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जल्द ही विशेष हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। बैठक में महिलाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए बैंक ऋण प्राप्त करने में आने वाली समस्याओं और जनसमर्थ पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों पर विस्तार से चर्चा हुई। महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, असम और उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों की महिलाओं ने केंद्रीय मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। महिलाओं ने उद्योग के लिए बैंक ऋण मिलने में देरी और नियमों की जटिलता का मुद्दा उठाया। विभिन्न राज्यों के मिशन अधिकारियों ने जनसमर्थ पोर्टल के इस्तेमाल में आने वाली तकनीकी समस्याओं के साथ लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को बैंक ऋण देने से संबंधित भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों का गहन अध्ययन किया जाएगा। महिलाओं को बैंक स्तर पर परेशानी न हो, इसके लिए आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर नीतिगत समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण सरकार का प्रमुख लक्ष्य है और देश में 6 करोड़ लखपति दीदी तैयार करने का लक्ष्य समय पर हासिल करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को मिशन मोड में काम करना होगा।महाराष्ट्र के ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने कहा कि देश में 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य के तहत महाराष्ट्र में वर्तमान में 50 लाख लखपति दीदी हैं और राज्य सरकार ने यह संख्या एक करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। राज्य में वर्तमान में 6 लाख 72 हजार स्वयं सहायता समूह और 34 हजार 885 ग्राम संघ कार्यरत हैं। नए बचत समूहों के गठन और बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया को भी गति दी जा रही है। स्वयं सहायता समूहों का ऋण चुकाने का रिकॉर्ड बेहतर और एनपीए बेहद कम होने के कारण बैंकों को महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ऋण प्रक्रिया सरल और तेज करनी चाहिए। ग्राम विकास राज्यमंत्री योगेश कदम ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने, महिलाओं के डिजिटल लेनदेन का रिकॉर्ड तैयार करने और लखपति दीदी के लक्ष्य की पूर्ति के लिए महिलाओं को व्यक्तिगत ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया।केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव अमित शुक्ला ने ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत ‘वित्तीय समावेशन 2.0’, ‘बीसी सखी’ पहल और वित्तीय साक्षरता की कार्ययोजना प्रस्तुत की। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के महिला स्वयं सहायता समूहों को सफल व्यक्तिगत उद्यमों में बदलने के लिए सरल और त्वरित ऋण उपलब्ध कराने पर सहमति बनी। राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान, केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्यमंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, महाराष्ट्र के ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे, राज्यमंत्री योगेश कदम, केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल और महाराष्ट्र ग्राम विकास विभाग के सचिव डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन में स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया सहित 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी सहित चार निजी बैंक, 11 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्ष तथा आरबीआई, नाबार्ड, नीति आयोग, वित्तीय सेवा विभाग और पीएफआरडीए के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

