CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन मामले में 17 को जमानत, पत्रकार और छात्र भी शामिल

पटियाला हाउस कोर्ट ने ₹15-₹15 हजार के मुचलके पर दी राहत, पुलिस ने मांगी थी 14 दिन की न्यायिक हिरासत, हिरासत में मारपीट के आरोप पर DCP से रिपोर्ट तलब


नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों और फ्रीलांस पत्रकारों समेत कुल 17 आरोपियों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अनिमेष कुमार ने 5 अक्टूबर की रात चार अलग-अलग आदेशों में सभी आरोपियों को 15-15 हजार रुपये के जमानती मुचलके और समान राशि की एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। मामला संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की थी। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक स्थान को बाधित किया गया, पुलिसकर्मियों के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की और मारपीट हुई तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार निर्विवाद है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि आरोपी युवा हैं, आदतन अपराधी प्रतीत नहीं होते और उनका भविष्य उनके सामने है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सैमन फारूकी ने पुलिस की हिरासत की मांग का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के आधार में उनकी व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट नहीं की गई है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस के अनुसार प्रदर्शन में करीब 50 लोग मौजूद थे, लेकिन केवल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया और कथित घटना का CCTV फुटेज भी अदालत के सामने पेश नहीं किया गया।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि कुछ आरोपियों को चोटें आई थीं और घटना के तुरंत बाद उनका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। अदालत ने घायल आरोपियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। वहीं, दो आरोपियों ने संसद मार्ग पुलिस थाने में हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। इस पर अदालत ने संबंधित DCP से रिपोर्ट तलब की और मामले से जुड़े CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। ये हिरासत में मारपीट के आरोप हैं और इनकी पुष्टि संबंधित जांच एवं रिपोर्ट के बाद होगी। अदालत ने जमानत की शर्तों के तहत आरोपियों को गवाहों को प्रभावित नहीं करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने, अपना सही पता और सक्रिय मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने तथा अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है।

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