
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि ठाणे सत्र न्यायालय ने बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराए गए पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्षों पर अपनी रोक आगे नहीं बढ़ाई है। राज्य सरकार ने इस महीने की शुरुआत में सत्र न्यायालय के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें पुलिसकर्मियों के आवेदन पर मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्षों को “स्थगित” किया गया था। सरकारी वकील हितेन वेनेगांवकर ने न्यायमूर्ति आर.एन. लड्ढा के समक्ष कहा कि अब जब सत्र न्यायालय ने आदेश आगे नहीं बढ़ाया है, तो राज्य सरकार पूरी कार्यवाही की वैधता को चुनौती देने के लिए अपनी याचिका में संशोधन करना चाहती है।
वेनेगांवकर ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट जांच एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी, न कि न्यायिक, इसलिए पांचों पुलिसकर्मी इस पर पुनरीक्षण याचिका दायर नहीं कर सकते थे। उन्होंने आगे कहा कि हाईकोर्ट की एक खंडपीठ पहले से ही आरोपियों के एनकाउंटर से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है, ऐसे में सत्र न्यायालय का पुलिसकर्मियों के आवेदन पर सुनवाई करना “अनुचित” था। न्यायमूर्ति लड्ढा ने सरकार को याचिका में संशोधन की अनुमति दी और पांचों पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 मई की तारीख तय की।
क्या है पूरा मामला?
आरोपी को बदलापुर पुलिस ने स्थानीय स्कूल में नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया था। बाद में तलोजा जेल में न्यायिक हिरासत के दौरान उसकी पत्नी द्वारा दर्ज दूसरी एफआईआर के आधार पर, उसे 23 सितंबर को पुलिस हिरासत में लिया गया। पुलिस का दावा था कि आरोपी ने ट्रांजिट के दौरान, जब उसे तलोजा जेल से कल्याण ले जाया जा रहा था, एक पुलिसकर्मी की बंदूक छीनने की कोशिश की, जिससे आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी और उसकी मौत हो गई। हालांकि, मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट ने इस दावे पर संदेह जताते हुए पांच पुलिसकर्मियों को आरोपी की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। रिपोर्ट को पुलिसकर्मियों ने ठाणे सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी, जहां निष्कर्षों पर फिलहाल रोक लगी थी। अब, राज्य सरकार ने इस रोक को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, और आगे की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं।




