स्टाइपेंड समानता की मांग पर उज्जैन में आयुर्वेद विद्यार्थियों का आंदोलन तेज, भूख हड़ताल के बीच किया सामूहिक रक्तदान
250 विद्यार्थी धरने पर, ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ के बाद रक्तदान शिविर, लिखित आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

उज्जैन, मध्य प्रदेश। स्टाइपेंड में समानता की मांग को लेकर शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के विद्यार्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। करीब 250 विद्यार्थी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों ने भूख हड़ताल की, सरकार की ‘सद्बुद्धि’ के लिए यज्ञ किया और इसके बाद सामूहिक रक्तदान शिविर आयोजित कर मरीजों तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। आंदोलनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से सत्याग्रह कर रहे हैं। उनका कहना है कि विरोध के बावजूद चिकित्सक के रूप में समाजसेवा और मरीजों के प्रति दायित्व उनके लिए सर्वोपरि है। इसी भावना के तहत भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों ने रक्तदान कर आंदोलन को सेवाभावी स्वरूप दिया। विद्यार्थियों की मुख्य मांग है कि एलोपैथी (MBBS) और आयुर्वेद (BAMS/MD) के विद्यार्थियों को मिलने वाले स्टाइपेंड में मौजूद असमानता समाप्त की जाए। उनका कहना है कि समान स्तर पर चिकित्सा शिक्षा और सेवाएं देने के बावजूद आयुर्वेद विद्यार्थियों को अपेक्षाकृत कम स्टाइपेंड मिलता है। इस मांग को लेकर वे लंबे समय से शासन और संबंधित विभागों के समक्ष अपनी बात रख रहे हैं। आंदोलन में शामिल छात्र विक्रांत कुमार ने कहा कि अब केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों की मांग है कि स्टाइपेंड में वृद्धि को लेकर सरकार स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करे। उन्होंने कहा कि जब तक औपचारिक शासकीय आदेश जारी नहीं होता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। विद्यार्थियों के अनुसार करीब 23 दिन पहले अधिकारियों और आयुष मंत्री को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 सितंबर को भोपाल में आयुर्वेद महाविद्यालय के विद्यार्थियों का स्टाइपेंड जल्द बढ़ाने की घोषणा की थी। विद्यार्थियों का कहना है कि घोषणा के बाद उन्हें जल्द आदेश जारी होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक लिखित आदेश नहीं मिलने से निराशा और नाराजगी बढ़ रही है। सोमवार से शुरू हुए इस आंदोलन में छात्र-छात्राएं हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को विद्यार्थियों ने ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ आयोजित कर सरकार से उनकी मांग पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की अपील की। इसके बाद आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए भूख हड़ताल शुरू की गई। इसी क्रम में विद्यार्थियों ने सामूहिक रक्तदान शिविर भी आयोजित किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना है। रक्तदान के माध्यम से वे यह बताना चाहते हैं कि आंदोलन के दौरान भी मरीजों की सेवा और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी बनी हुई है। विद्यार्थियों ने कहा कि सरकार से उनकी अपेक्षा केवल इतनी है कि मुख्यमंत्री की घोषणा को जल्द से जल्द औपचारिक आदेश का रूप दिया जाए। उनका कहना है कि लिखित आदेश मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि स्टाइपेंड वृद्धि कब से और किस स्तर पर लागू होगी। आंदोलनकारी विद्यार्थियों ने दोहराया कि वे हिंसक या टकराव का रास्ता नहीं अपनाएंगे और मांग पूरी होने तक शांतिपूर्ण, गांधीवादी और रचनात्मक आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि भूख हड़ताल, यज्ञ और रक्तदान के जरिए वे सरकार का ध्यान अपनी मांग की ओर आकर्षित कर रहे हैं और अब उन्हें लिखित निर्णय का इंतजार है।
