झारखंड DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, केंद्र सरकार ने दायर की याचिका

अनुराग गुप्ता और तदाशा मिश्रा की नियुक्तियों पर भी सवाल, केंद्र का आरोप— UPSC की अनिवार्य चयन प्रक्रिया की अनदेखी कर बनाए गए नियम

नई दिल्ली/झारखंड। केंद्र सरकार ने बुधवार को झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। केंद्र ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और UPSC से जुड़ी अनिवार्य चयन प्रक्रिया की अनदेखी की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ के समक्ष केंद्र के आवेदन का उल्लेख किया। पीठ ने आवेदन पर सुनवाई करने और इसे सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से झारखंड सरकार को DGP की नियुक्ति के लिए ‘प्रकाश सिंह’ मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन करने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही वैकल्पिक रूप से झारखंड के 2025 के विनियमन के तहत की गई DGP नियुक्तियों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया गया है। केंद्र की चुनौती ‘झारखंड के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति संबंधी विनियम, 2025’ को लेकर है, जिसे 8 जनवरी 2025 को अधिसूचित किया गया था। याचिका में आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता और तदाशा मिश्रा की DGP के रूप में नियुक्तियों को भी चुनौती दी गई है। केंद्र के मुताबिक, अनुराग गुप्ता की नियुक्ति 2 फरवरी 2025 को उस समय की गई, जब उनकी सेवा अवधि लगभग तीन महीने ही शेष थी। वहीं तदाशा मिश्रा की नियुक्ति 30 दिसंबर 2025 को उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति से महज एक दिन पहले की गई। इससे पहले राज्य ने नियमों में संशोधन कर छह महीने की शेष सेवा अवधि की आवश्यकता को हटा दिया था। केंद्र सरकार का आरोप है कि झारखंड सरकार ने DGP को दो वर्ष का कार्यकाल देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले पर चुनिंदा तरीके से भरोसा किया, लेकिन UPSC से जुड़ी चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया। केंद्र का कहना है कि न्यायालय के निर्देशों को चुनिंदा रूप से नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से लागू किया जाना चाहिए। याचिका में राज्य सरकार द्वारा DGP नियुक्ति का प्रस्ताव UPSC को नहीं भेजे जाने से संबंधित पूर्व न्यायिक कार्यवाही का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 19 मई 2026 के उस निर्देश का जिक्र किया गया है, जिसमें अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा गया था। ‘प्रकाश सिंह’ मामला देश में पुलिस सुधारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस व्यवस्था में संस्थागत स्वतंत्रता, पारदर्शी नियुक्तियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कार्यकाल में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2006 से कई निर्देश जारी किए हैं। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, राज्य सरकार को सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर UPSC द्वारा चयनित तीन अधिकारियों के पैनल में से DGP की नियुक्ति करनी होती है। चयनित अधिकारी को सामान्यतः कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल दिए जाने का प्रावधान है। अब केंद्र की याचिका के बाद झारखंड में DGP की नियुक्ति प्रक्रिया और राज्य के 2025 के नियमों की वैधता का सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच गया है।

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