राम कृष्ण मिश्रा ‘वैरागी’ की ग़ज़ल पुस्तक ‘तू मेरा इश्क़ है’ जल्द पाठकों के बीच
इश्क़, एहसास और जज़्बातों को शब्दों में पिरोती ग़ज़लों का खूबसूरत संग्रह

मुंबई। इश्क़, एहसास, रिश्तों की नमी और जीवन के उतार-चढ़ाव को ग़ज़लों में पिरोने वाले एडवोकेट राम कृष्ण मिश्रा (आर.के.मिश्रा) ‘वैरागी’ जल्द ही अपने ग़ज़ल संग्रह ‘तू मेरा इश्क़ है’ के जरिए पाठकों से रूबरू होने जा रहे हैं। नीलम पब्लिकेशन के प्रकाशक दिनेश वर्मा ने बताया कि पुस्तक को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह ग़ज़ल संग्रह नवरात्र के शुभ अवसर पर पाठकों के लिए उपलब्ध हो सकती है। प्रकाशन से जुड़ी शेष प्रक्रियाएं भी पूरी की जा रही हैं। आर. के. मिश्रा ‘वैरागी’ पेशे से अधिवक्ता हैं और सामाजिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। ‘तू मेरा इश्क़ है’ में प्रेम को केवल भावनात्मक संबंध के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के अनुभव, संघर्ष, अपनापन और आत्मिक जुड़ाव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक की ग़ज़लों में रिश्तों की मिठास, विछोह की पीड़ा, उम्मीद, स्मृतियां और जीवन की सच्चाइयां अलग-अलग रंगों में सामने आती हैं। पुस्तक का आवरण भी आकर्षक रूप से तैयार किया गया है, जिसमें लेखक की साहित्यिक पहचान और ग़ज़ल संग्रह की भावनात्मक प्रकृति को प्रमुखता दी गई है। लेखक का मानना है कि ग़ज़ल केवल प्रेम की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और व्यक्ति के भीतर चल रहे संवाद का भी माध्यम है। इसी भावभूमि पर तैयार यह संग्रह पाठकों को भावनात्मक और चिंतनशील दोनों स्तरों पर जोड़ने का प्रयास करता है। साहित्य प्रेमियों के बीच पुस्तक को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। प्रकाशन के बाद इसे विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से पाठकों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। ‘तू मेरा इश्क़ है’ के माध्यम से एडवोकेट आर.के.मिश्रा ‘वैरागी’ अपनी साहित्यिक यात्रा का एक नया अध्याय पाठकों के सामने रखने जा रहे हैं।
