
मुंबई। महाराष्ट्र में रेलवे फाटकों को समाप्त कर सुरक्षित और सुगम यातायात व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने सोमवार को बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई महाराष्ट्र रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (महारेल) की बैठक में कुल 131 प्रस्तावित रेल अधोसंरचना परियोजनाओं में से पहले चरण की 65 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य को चरणबद्ध तरीके से ‘रेलवे फाटक मुक्त महाराष्ट्र’ बनाने के लिए आवश्यक पुल, अंडरपास और अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण तेजी से किया जाए। सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित बैठक में लोक निर्माण राज्यमंत्री इंद्रनील नाईक, विधायक प्रसाद लाड़ सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रेलवे ओवरब्रिज, अंडरपास और पैदल पुलों को मिलेगी प्राथमिकता
बैठक में निर्णय लिया गया कि लोक निर्माण और नगर विकास विभाग के अधीन आने वाली सड़कों पर रेलवे ओवरब्रिज, पैदल पुल तथा रेलवे लाइन के नीचे अंडरपास का निर्माण महारेल के माध्यम से किया जाएगा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि जिन स्थानों पर ट्रेन-व्हीकल यूनिट (टीवीयू) 25 हजार से लेकर एक लाख तक है और जहां भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम है, वहां के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए महानगरों और शहरों में नागरिकों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए समय रहते अधोसंरचना विकसित करना आवश्यक है। इसके तहत राज्य के विभिन्न शहरों में 80 रेलवे अधोसंरचना परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
मुंबई, पुणे, नागपुर सहित 15 शहरों में 80 परियोजनाएं प्रस्तावित
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा के लिए संबंधित नगर निगम आयुक्त और जिला कलेक्टर की समिति गठित की जाए, जो आवश्यकता और व्यवहार्यता की जांच के बाद कार्यों को अंतिम रूप देगी। उन्होंने नागपुर में कुछ फ्लाईओवरों पर भविष्य में संभावित यातायात दबाव को देखते हुए अग्रिम योजना बनाने तथा अमरावती-बडनेरा मार्ग पर नए रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण पर भी जोर दिया। बैठक में वित्तपोषण के लिए HUDCO से ऋण उपलब्ध कराने और महारेल को लोक निर्माण विभाग के अधीन लाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश भी दिए गए। प्रस्तावित 80 परियोजनाओं में मुंबई महानगर क्षेत्र की 17, पुणे की 15, नागपुर की 13, नाशिक और अमरावती की 5-5, सांगली की 4, छत्रपति संभाजीनगर, कोल्हापुर, धुले, लातूर और परभणी की 3-3, सोलापुर और जळगांव की 2-2 तथा अहिल्यानगर और नांदेड़ की एक-एक परियोजना शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में यातायात सुगम होगा और रेलवे फाटकों पर होने वाली दुर्घटनाओं तथा जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।



