मनोज जरांगे की 500 करोड़ वाली ऑडियो क्लिप की SIT जांच की मांग
भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन बोले— क्लिप असली, फर्जी या AI जनरेटेड, जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

मुंबई। मराठा नेता मनोज जरांगे पाटील द्वारा 500 करोड़ रुपये के मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा को लेकर लगाए गए आरोपों तथा इसके समर्थन में सुनाई गई ऑडियो क्लिप पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। इस बीच भाजपा ने क्लिप की सत्यता की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने गुरुवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में कहा कि AI के दौर में फर्जी ऑडियो और वीडियो बनाना संभव है, इसलिए जरांगे द्वारा सुनाई गई ऑडियो क्लिप की गहराई से जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले की SIT या विशेष जांच के माध्यम से सत्यता सामने लाने का अनुरोध करेंगे। बन ने कहा कि आज तकनीक की मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज की नकल की जा सकती है। ऐसे में केवल ऑडियो क्लिप के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, क्लिप असली है, फर्जी है, उसमें छेड़छाड़ की गई है या वह AI से तैयार की गई है, इसका पता तकनीकी और फोरेंसिक जांच से ही चल सकता है। उन्होंने कहा कि सामने आए कथित संवाद के संदर्भ विधानसभा चुनाव से पहले के प्रतीत होते हैं। इसलिए इस क्लिप के समय, संदर्भ और इसमें बातचीत करने वाले लोगों की पहचान की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि महाराष्ट्र की जनता के सामने तथ्य आ सकें। नवनाथ बन ने कहा कि क्लिप में 500 करोड़ रुपये और विधानसभा चुनाव का उल्लेख होने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे पहले ही किसी को 500 करोड़ रुपये देने से इनकार कर चुके हैं, जबकि मनोज जरांगे पाटील ने भी कहा है कि उन्होंने किसी से 500 करोड़ रुपये नहीं लिए। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि ऑडियो क्लिप जरांगे को किसने दी और इसका स्रोत क्या है। उन्होंने कहा कि पुलिस और गृह विभाग को यह जांच करने का अधिकार है कि क्लिप मूल है या उसमें किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। जांच पूरी होने से पहले इस पर अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
जरांगे की सुरक्षा पर भी भाजपा की प्रतिक्रिया
नवनाथ बन ने मनोज जरांगे पाटील की सुरक्षा से जुड़े सवाल पर कहा कि यदि उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता है तो गृह विभाग इस संबंध में उचित निर्णय ले सकता है। उन्होंने कहा कि जरांगे लंबे समय से मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा महत्वपूर्ण है। बन ने कहा कि यदि वर्तमान सुरक्षा अपर्याप्त पाई जाती है तो पुलिस अधिकारी और गृह विभाग परिस्थितियों का आकलन कर उसे बढ़ाने पर निर्णय ले सकते हैं।
