PACL निवेश घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई: महाराष्ट्र में 567 करोड़ की 48 संपत्तियां जब्त
पुणे, मुंबई और रायगढ़ की अचल संपत्तियों पर अस्थायी कुर्की, निवेशकों से 48 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटाने का मामला

पिंपरी। देशभर के लाखों निवेशकों से करीब 48 हजार करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े PACL निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने महाराष्ट्र के पुणे, मुंबई और रायगढ़ में स्थित करीब 567.45 करोड़ रुपये बाजार मूल्य की 48 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ED के अनुसार, ये संपत्तियां प्रतीक कुमार, उनके बेटे अंश प्रतीक कुमार तथा उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर हैं। कार्रवाई ED के दिल्ली जोनल कार्यालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, जिन कंपनियों के नाम पर संपत्तियां मिली हैं उनमें बीमिंग इन्फ्राडेवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, गणराज प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड शामिल हैं। ED का दावा है कि इन कंपनियों पर वास्तविक नियंत्रण प्रतीक कुमार का था।
कृषि भूमि के नाम पर निवेश जुटाने का आरोप
इस मामले में ED ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज मामले के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। CBI के आरोपपत्र के अनुसार, PACL और उससे जुड़ी कंपनियों ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास के नाम पर सामूहिक निवेश योजनाएं चलाईं। निवेशकों को एकमुश्त या किश्तों में भुगतान करने के विकल्प दिए गए। उनसे समझौते, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन आरोप है कि बड़ी संख्या में निवेशकों को वास्तविक जमीन नहीं दी गई।
देशभर से जुटाए गए 48 हजार करोड़ रुपये से अधिक
CBI के आरोपपत्र में कहा गया है कि इस योजना के जरिए देशभर के लाखों नागरिकों से 48 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई। इसमें से करीब 48 हजार करोड़ रुपये निवेशकों को वापस नहीं मिलने की बात कही गई है।CBI इस मामले में अब तक 33 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
निवेशकों का पैसा संपत्तियां खरीदने में लगाने का दावा
ED की जांच के अनुसार, PACL के पास जमा निवेशकों के धन को कथित रूप से दूसरी जगह डायवर्ट कर संबंधित अचल संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का दावा है कि इस कारण ये संपत्तियां अपराध से अर्जित आय का हिस्सा हैं।प्रतीक कुमार को अगस्त 2022 में दाखिल पहले पूरक अभियोजन शिकायत में आरोपी बनाया गया था। विशेष अदालत ने 19 सितंबर 2022 को इसका संज्ञान लिया था। इसके बाद 9 अप्रैल 2024 को प्रतीक कुमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया।
अब तक 30 हजार करोड़ से अधिक की संपत्तियों पर कार्रवाई
ED ने इस मामले में वर्ष 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच दर्ज की थी। इसके बाद वर्ष 2018 में अभियोजन शिकायत दाखिल की गई और आगे चलकर छह पूरक अभियोजन शिकायतें भी दाखिल की गईं। वर्तमान कार्रवाई को मिलाकर देश और विदेश में अब तक करीब 30,235.21 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों पर अस्थायी कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है।
