
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीन स्वास्थ्य पहलों का किया शुभारंभ, कोल्हापुर में ‘महा पल्स AI’ का पायलट प्रोजेक्ट
मुंबई। महाराष्ट्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने तीन महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में मंगलवार को सरकारी निवास ‘वर्षा’ में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के एकीकृत स्वास्थ्य डैशबोर्ड, एकीकृत स्वास्थ्य सुविधा केंद्र और सरकारी अस्पतालों की स्टार रेटिंग प्रणाली का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का केवल संकलन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इनका इस्तेमाल जनहित और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए होना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को इन तीनों पहलों को प्रभावी ढंग से लागू कर नागरिकों को अधिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, राज्यमंत्री मेघना साकोरे बोर्डीकर, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्रा, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, स्वास्थ्य विभाग के सचिव ई. रवींद्रन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
40 से अधिक स्वास्थ्य पोर्टल का डेटा एक जगह
स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए फिलहाल 40 से अधिक अलग-अलग पोर्टल संचालित हैं। इन पोर्टलों पर उपलब्ध महत्वपूर्ण जानकारी को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य डैशबोर्ड विकसित किया गया है। इसमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, क्षयरोग नियंत्रण, गैर-संचारी रोगों की जांच सहित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े प्रमुख संकेतकों का राज्य और जिलावार विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की जल्द पहचान, जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन और जरूरत के अनुसार तत्काल उपाय करना आसान होगा। सरकार का दावा है कि इससे स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को कार्रवाई योग्य डेटा में बदलकर प्रशासनिक निर्णय अधिक तेज और सटीक बनाए जा सकेंगे।
‘104’ से गर्भवती महिलाओं और मरीजों का फॉलोअप
एकीकृत स्वास्थ्य सुविधा केंद्र के तहत ‘104’ कॉल सेंटर को भी अधिक व्यवस्थित किया गया है। यहां नागरिकों से आने वाले फोन के साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए जाने वाले संपर्क कॉल का भी संचालन किया जाएगा। केंद्र के माध्यम से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं, प्रसव के बाद की माताओं, टीबी मरीजों और गैर-संचारी रोगों से जुड़े मरीजों का फॉलोअप किया जाएगा। साथ ही सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सेवाओं के बारे में मरीजों और नागरिकों से सीधे फीडबैक लिया जाएगा। कॉल सेंटर में प्रतिदिन करीब एक हजार कॉल संभालने की क्षमता विकसित की गई है और इसके लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर तैनात किए जाएंगे। गंभीर अथवा तत्काल कार्रवाई वाले मामलों की जानकारी सीधे संबंधित जिलास्तरीय अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है।
सरकारी अस्पतालों की होगी स्टार रेटिंग
राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए स्टार रेटिंग प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत अस्पतालों का मूल्यांकन विशेष चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता, प्रयोगशाला सेवाओं, ओपीडी-आईपीडी सेवाओं, प्रसव एवं ऑपरेशन की संख्या, स्वच्छता, बुनियादी सुविधाओं और मरीजों के फीडबैक जैसे मानकों पर किया जाएगा। इस प्रणाली के जरिए नागरिक घर बैठे सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। नागरिकों की शिकायत या फीडबैक पर जरूरत पड़ने पर जिलास्तर पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद संबंधित नागरिक से दोबारा संपर्क कर यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि उसे वास्तव में सेवा मिली या नहीं। यानी व्यवस्था में केवल ‘सेवा दी गई या नहीं’ नहीं, बल्कि ‘मरीज को सेवा मिली या नहीं’ इस पर भी नजर रखी जाएगी।
कोल्हापुर में ‘महा पल्स AI’ का पायलट प्रोजेक्ट
राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की दिशा में ‘महा पल्स AI’ के पायलट प्रोजेक्ट के लिए कोल्हापुर जिले का चयन किया है। इसके तहत जिले की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को AI आधारित डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाएगा। कोल्हापुर की 104 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं और 12 तालुकों को एक एकीकृत डिजिटल प्रणाली से जोड़ने की योजना है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, उपलब्ध संसाधनों का प्रबंधन और नागरिकों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं का फॉलोअप अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव निपुण विनायक ने ‘मिशन आरोग्यम्’ के तहत विभाग की प्रमुख पहलों, उनकी कार्यप्रणाली और अपेक्षित परिणामों की जानकारी दी। सरकार का कहना है कि इन तकनीक आधारित व्यवस्थाओं से राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सक्षम, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने में मदद मिलेगी।

