नगर निकायों में परिवार रजिस्टर की नकल नहीं मिलने से नागरिक परेशान
गांवों के शहरी सीमा में शामिल होने के बाद पेंशन, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं के लिए बढ़ी मुश्किलें

बांगरमऊ, उन्नाव। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों को नगर पालिका और नगर पंचायतों में शामिल कर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने अब परिवार रजिस्टर की नकल प्राप्त करना बड़ी समस्या बन गया है। पेंशन, राशन कार्ड, छात्रवृत्ति, जमीन से जुड़े दस्तावेजी कार्य और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए परिवार रजिस्टर की नकल मांगे जाने पर नागरिकों को नगर निकाय, तहसील और ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, नगर पालिका या नगर पंचायत कार्यालय पहुंचने पर उन्हें बताया जाता है कि शहरी निकायों में परिवार अथवा कुटुंब रजिस्टर के रखरखाव और उसकी प्रमाणित नकल जारी करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। वहीं ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव के माध्यम से यह दस्तावेज उपलब्ध हो जाता है। समस्या तब बढ़ जाती है, जब कोई गांव नगर पंचायत या नगर पालिका की सीमा में शामिल हो जाता है। नागरिकों का कहना है कि वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन कार्ड में नाम जोड़ने या संशोधन कराने समेत कई सरकारी प्रक्रियाओं में परिवार रजिस्टर की नकल की जरूरत पड़ती है। कई मामलों में तहसील और ब्लॉक कार्यालय लोगों को नगर पालिका भेज देते हैं, जबकि नगर निकाय अधिकारी स्पष्ट कानूनी प्रावधान न होने की बात कहकर नकल जारी करने में असमर्थता जताते हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि किसी गांव को नगर पंचायत या नगर पालिका में शामिल करने का उद्देश्य सुविधाएं बढ़ाना है, तो शहरी क्षेत्र घोषित होने के बाद पहले से उपलब्ध जरूरी दस्तावेज प्राप्त करना कठिन क्यों हो रहा है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था की अस्पष्टता का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि नगर निकायों में भी परिवार रजिस्टर तैयार करने और उसकी प्रमाणित नकल जारी करने की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। इसके लिए आवश्यक कानूनी संशोधन या शासनादेश जारी करने के साथ ऑनलाइन सुविधा भी शुरू की जाए, ताकि लोगों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। नागरिकों ने यह भी मांग की है कि जब तक स्थायी व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक वार्ड सभासद के सत्यापन या नगर निकाय द्वारा जारी किसी वैकल्पिक आधिकारिक प्रमाण पत्र को सरकारी कार्यों में स्वीकार किया जाए। लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों का शहरी निकायों में विलय नागरिक सुविधाएं बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि जरूरी दस्तावेजों के लिए नई परेशानी खड़ी करने के लिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शहरी सीमा में शामिल परिवारों के अभिलेखों की जिम्मेदारी आखिर किस विभाग की होगी और इसका स्थायी समाधान कब निकलेगा।
